Pratinidhi Kavitayen : Praveen Shakir

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Pratinidhi Kavitayen : Praveen Shakir

पाकिस्तान की उर्दू शायरी में परवीन शाकिर की गणना प्रेम की नाजुक मूर्ति के रूप में होती है। परवीन का प्रेम अपने अद्वितीय अन्दाज़ में ‘नर्म सुख़न’ बनकर फूटा है और अपनी ‘ख़ुशबू’ से उसने उर्दू शायरी की दुनिया को सराबोर कर दिया है।

पाकिस्तान की ही प्रसिद्ध कवयित्री फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार, ‘परवीन के शे’रों में लोकगीतों की सी सादगी और लय भी है और क्लासिकी मौसीकी (शास्त्रीय संगीत) की नफ़ासत और नज़ाकत भी। उसकी नज़्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफ़िस्टिकेशन का दिलआवेज़ संगम हैं।’

परवीर शाकिर की शायरी का केन्द्रीय विषय ‘स्त्री’ है। प्रेम में टूटी हुई, बिखरी हुई खुद्दार स्त्री। लेकिन उसकी शायरी की यह कोई सीमा नहीं है। वस्तुतः परवीन की शायरी प्रेम की एक ऐसी लोरी है जो अपने मद्धिम-मद्धिम सुरों से सोते हुओं को जगाने का काम करती है।

परवीन की शायरी में रूमानियत भी है और गहरी ऐंद्रिकता भी, पर कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि सामने की दुनिया सिर्फ़ एक सपना है। अपनी सूक्ष्म यथार्थपरकता के कारण ही मुख्य रूप से ‘स्त्री’ और ‘प्रेम’ को आधार बनाकर लिखी गई ये कविताएँ अनुभूति के व्यापक द्वार खोलती हैं।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 1994
Edition Year 2022, Ed 10th
Pages 142p
Translator Abdul Bismillah
Editor Abdul Bismillah
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
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Parveen Shakir

Author: Parveen Shakir

परवीन शाकिर

सैयदा परवीन शाकिर का जन्म 24 नवम्बर, 1952 को कराची, सिन्ध, पाकिस्तान में हुआ।

परवीन शाकिर एक उर्दू कवयित्री, शिक्षक और पाकिस्तान सरकार की सिविल सेवा में एक अधिकारी थीं।

वे उर्दू शायरी में एक युग का प्रतिनिधित्व करती हैं। फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार वे पाकिस्तान की उन कवयित्रियों में से एक थीं जिनके शेरों में लोकगीत की सादगी और लय भी है और क्लासिकी संगीत की नफ़ासत भी और नज़ाकत भी। पाकिस्तान की मशहूर शायरा परवीन शाकिर के बारे में कहा जाता है कि जब उन्होंने 1982 में सेंट्रल सुपीरियर सर्विस की लिखित परीक्षा दी तो उस परीक्षा में उन्हीं पर एक सवाल पूछा गया था जिसे देखकर वह आत्मविभोर हो गई थीं।

प्रमुख कृतियाँ : ‘खुली आँखों में सपना’, ‘ख़ुशबू, सदबर्ग’, ‘इंकार’, ‘रहमतों की बारिश’, ‘ख़ुद-कलामी’, ‘माह-ए-तमाम’ आदि हैं।

निधन : 26 दिसम्बर, 1994, इस्लामाबाद (पाकिस्तान)।

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