Pratinidhi Kavitayen : Harivanshrai Bachhan

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Pratinidhi Kavitayen : Harivanshrai Bachhan
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जीवन और योवन, सत्य और स्वप्न तथा सौन्दर्य और प्रेम के अप्रतिम कवि हरिवशराय बच्चन के विशाल काव्य-कोष से चुनी हुई ये कविताएँ बहुत दूर तक आपके साथ जाने वाली है । अपने जीवन का कोई-न-कोई रंग, कोई-न-कोई पहलू इनके शब्दबंधों में आप अवश्य तलाश लेंगे और कविता सहज ही आपकी निजी संवेदना का हिस्सा बन जाएगी । बच्चन-काव्य की यह एक ऐसी विशेषता है, जिससे छायावादोत्तर हिंदी कविता को लोकग्राह्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । दाय के रूप में प्राप्त छायावादी प्रयोगात्मक काव्य-शैली से अप्रभावित रहकर उन्होंने जीवन-सत्यों की अनुभुतिगम्य रचना की । काव्य-क्षेत्र में उनके पदार्पण और रचनात्मक विद्रोह को लक्ष्य करते हुए एक प्रक्यत समालोचक ने लिखा था कि “बच्चन सारा ढांचा बदलकर आए नई भाषा, नई अभिव्यंजना और नए किस्म की अनुभूति, उनका सब कुछ नया-ही-नया है ।” निश्चय ही बच्चन-काव्य का यह नयापन इस शताब्दी के पांच दशकों में फैला हुआ है और इस काल में होने वाली तमाम सामाजिक उथल-पुथल को भी उन्होंने कविताओ में रेखांकित किया है, पर इस सबको अनुभूति की आँख और संवेदना की छुं से ही परखा जा सकता है । तो आइए, इन कविताओं के माध्यम से हम अपने जीवन-यथार्थ और मनोमय भावलोक की यात्रा पर चलें ।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 1986
Edition Year 2021, Ed. 14th
Pages 144p
Translator Not Selected
Editor Mohan Gupta
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
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Editorial Review

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Harivansh Ray Bachchan

Author: Harivansh Ray Bachchan

हरिवंशराय बच्चन

जन्म: 27 नवम्बर, 1907। जन्म-स्थान: इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) सम्पूर्ण शिक्षा म्यूनिसिपल स्कूल, कायस्थ पाठशाला, गवर्नमेंट कॉलेज, इलाहाबाद, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी तथा काशी विश्वविद्यालय में।

सृजनशील लेखन की शुरुआत 1929 से। प्रारम्भ में कुछ कहानियाँ भी। 1941 से 1952 तक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के लेक्चरर। 1952 से 1954 तक इंग्लैंड में रहकर यीट्स के काव्य पर शोधकार्य, फलस्वरूप कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की डिग्री। लौटकर पुनः पूर्व पद पर। फिर कुछ मास तक आकाशवाणी, इलाहाबाद में हिन्दी प्रोड्यूसर। इसके बाद 16 वर्षों तक दिल्ली - 10 वर्ष विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ तथा 6 वर्ष राज्यसभा के मनोनीत सदस्य।

निधन: 18 जनवरी, 2003

प्रकाशित कृतियाँ: मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा-निमन्त्रण, एकान्त संगीत, आकुल अन्तर, सतरंगिनी, हलाहल, बंगाल का काल, खादी के फूल, सूत की माला, मिलन यामिनी, प्रणय पत्रिका, धार के इधर-उधर, आरती और अंगारे, बुद्ध और नाचघर, त्रिभंगिमा, चार खेमे चौंसठ खूँटे, दो चट्टानें, बहुत दिन बीते, कटती प्रतिमाओं की आवाज, उभरते प्रतिमानों के रूप, जाल समेटा, अतीत की प्रतिध्वनियाँ, प्रारम्भिक रचनाएँ, नयी से नयी पुरानी से पुरानी (काव्य-संग्रह); क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक (आत्मकथा-खण्ड); प्रवास की डायरी (डायरी), कवियों में सौम्य सन्त, नए-पुराने झरोखे, टूटी-छूटी कड़ियाँ (आलोचना निबन्ध) तथा खैयाम और शेक्सपीयर के अनुवाद।

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