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Nrishans-Hard Cover

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9788126701612
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अवधेश प्रीत को समय और समाज से संवादरत ऐसे लेखक के रूप में जाना जाता है, जो सच को सच की तरह कहता ही नहीं, बल्कि कई–कई अनुद्घाटित सच्चाइयों से भी परिचित कराता है। उनकी कहानियों से गुज़रना दुर्लभ अनुभवों के वर्जित क्षेत्र में प्रवेश करना है, जिसकी फ़िज़ा में आदिम गन्ध तैरती रहती है। लेकिन कथाकार इनसे बचने के लिए नाक पर रूमाल नहीं रखता, वरन् उनके कारणों और परिणामों की, चीड़–फाड़ करता है।

शीर्षक कथा ‘नृशंस’ समेत संग्रह की तमाम कहानियाँ मौजूदा समय में स्खलित होती संवेदना और सामाजिक सम्बन्धों के बीच चौड़ी होती दरारों की तरफ़ हमारा ध्यान खींचती हैं। भाषा की सहजता, शिल्प की सजगता और कथानक की व्यापकता इन कहानियों की ख़ूबियाँ हैं। ‘नृशंस’ नक्सलवाद के बहाने पूरे तंत्र पर तीक्ष्ण प्रहार करती है तो ‘अली मंज़िल’ भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों की पीड़ा को सहानुभूतिपूर्वक उभारती है। ‘ग्रासरूट’ सामाजिक विकृति के आयामों से सम्पृक्त होकर मानवीय चरित्र को चतुष्कोणीय दृष्टि से देखने का प्रयास करती है। ‘फलितार्थ’ एक छतरी को केन्द्र में रखकर भारतीय किसान–मज़दूर की जद्दोजेहद को विस्तार देती है। यह कहानी किसान की आर्थिक दिक़्क़तों, नए दौर में पुरानी चीज़ों के प्रति मोह, संस्कृति एवं परम्पराओं से जुड़ी अन्तरंग भावनाओं के आयामों के दम तोड़ते समय को अंकित करने में सफल है। ग्रामीण जीवन को रेखांकित करते समय क्षेत्रीय बोलियों का यथोचित इस्तेमाल तथा किसान, मज़दूरों की धड़कन की गहरी अनुभूति कथाकार को एक विशिष्ट दर्जा प्रदान करती है।

अधिकांश कहानियाँ अपनी ताज़गी, सादगी और बेबाकी के कारण चर्चित और प्रशंसित हुर्इं और अपनी सम्प्रेषणीयता, व्यापकता और ग्राह्यता के चलते इन्होंने नाट्य–निर्देशकों को भी आकर्षित किया है। ‘ग्रासरूट’, ‘नृशंस’, ‘तालीम’ और ‘फलितार्थ’ कहानियों का पटना से दिल्ली तक हुआ सफल मंचन इसका प्रमाण है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8126701617
Publication Year 2001
Edition Year 2024, Ed. 2nd
Pages 155p
Price ₹595.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Avinash Kalla

Author: Avinash Kalla

अविनाश कल्ला

अविनाश कल्ला का जन्म 1 मार्च 1979 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ। इन्होंने सिविल इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई के बाद दस वर्षों तक पत्रकारिता की। उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्टमिन्स्टर, लन्दन से पत्रकारिता में एम.ए. किया। द टाईम्स ऑफ़ इंडिया, मेल टुडे, द हिन्दू, द ट्रिब्यून, डेक्कन हेराल्ड, राजस्थान पत्रिका और गल्फ़ न्यूज़ आदि में प्रकाशित होते रहे अविनाश पत्रकारिता के अनूठे अन्तरराष्ट्रीय आयोजन ‘टॉक जर्नलिज़्म’ (जयपुर) के संस्थापक है। सिनेमा और क्रिकेट देखने, यात्रा करने और लोगों से मिलने-जुलने में इनकी गहरी दिलचस्पी है। ‘अमेरिका 2020 : एक बँटा हुआ देश’ इनकी पहली किताब है।

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