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हिन्दी कहानी का संसार इन दिनों नए कथाकारों की उपस्थिति से स्पन्दित है। नए जीवनानुभवों ने कथा-परिदृश्य को विविधवर्णी बनाया है। ‘मास्टर शॉट’ कथा-संकलन में शामिल फ़रीद ख़ाँ की कहानियाँ इसका साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। इन कहानियों में फ़िल्मों और मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया में ज़िन्दगी की लय तलाशते लोग शामिल हैं। कला और व्यवसाय के अन्तर्द्वंद्वों के अलावा तुरन्त सब कुछ पा लेने की आकुलता के बीच नष्ट होती मानवीय संवेदनाओं को बचाए रखने की अन्तिम कोशिशों के कई मार्मिक क्षण इन कहानियों में जीवन्तता के साथ दर्ज़ हैं।

फ़रीद ख़ाँ ने ‘आलता’ कहानी में बलात्कार पीड़िता इरावती की कथा कहते हुए बाज़ार का गुलाम बन चुके मीडिया और मनोरंजन-जगत की नृशंसता को कलात्मकता के साथ रचा है। ‘वीणा के तार’ के रामनरेश भइया गोरखपुर जैसे क़स्बाई शहर से हिन्दी में एम.ए. करके अपने मध्यवर्गीय प्रपंचों के साथ मुम्बई पहुँचते हैं और बार-बार चकित होते हैं। मीनाक्षी और श्रीपद की कथा ‘मास्टर शॉट’ मायानगरी मुम्बई के बहाने स्त्री के प्रति समाज के भीतर पलते अविश्वास की कथा है।

फ़रीद मूलतः कवि हैं। वे दृश्य माध्यमों के लिए भी कहानियाँ, पटकथा और संवाद लिखते रहे हैं। इस संकलन की कहानियों पर दृश्य माध्यमों के लिए लेखन के अनुभव का सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है। अधिकांश यथार्थ दृश्यों में अभिव्यक्त होता है। संवाद भी अपना सघन प्रभाव रचते हैं। कविता और दृश्य रचने की कला से कथाकार ने इन कहानियों के लिए सान्द्रता अर्जित की है। मुझे उम्मीद है कि यथार्थ की अलग भूमि पर चित्रित ये कहानियाँ हिन्दी के विशाल पाठक-वर्ग का ध्यान आकर्षित करेंगी।

—हृषीकेश सुलभ

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 136p
Price ₹199.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 19.5 X 12.5 X 1
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Farid Khan

Author: Farid Khan

फ़रीद ख़ाँ

फ़रीद ख़ाँ का जन्म 29 जनवरी, 1975 को पटना, बिहार में हुआ। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में एम.ए. किया। पटना इप्टा के साथ जुड़कर रंगकर्म। भारतेन्दु नाट्य अकादेमी, लखनऊ से नाट्य कला में दो वर्षीय प्रशिक्षण। पिछले कई वर्षों से मुम्बई में फ़िल्म और टीवी के लिए व्यवसायिक लेखन। चंद्रप्रकाश द्विवेदी के साथ ‘उपनिषद गंगा’ नामक धारावाहिक का लेखन। आने वाली फ़िल्म ‘पटना शुक्ला’।

उनकी प्रकाशित कृतियाँ ‌हैं—‘गीली मिट्टी पर पंजों के निशान’ (कविता-संग्रह); ‘मास्टर शॉट’ (कहानी-संग्रह); ‘अपनों के बीच अजनबी’ (कथेतर गद्य)।

‘हंस’, ‘कथादेश’, ‘तद्भव’, ‘आलोचना’, ‘उद्भावना’ और ‘इंडियन लिटरेचर’ आदि पत्रिकाओं में कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित। अनेक प्रतिनिधि संकलनों में कविताएँ संकलित। अंग्रेजी, मलयाली, मराठी और नेपाली में कविताओं का अनुवाद और प्रकाशन।

ई-मेल : [email protected]

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