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Markat Dweep Ki Neelmani-Paper Back

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9788171196180
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प्रसिद्ध गीतकार कुँवर बेचैन का कलात्मक शैली में लिखा गया अनूठा ललित उपन्यास है—‘मरकतद्वीप की नीलमणि’। सच और कल्पना के सूत्रों में पिरोयी यह ‘मोनोलॉग’ जैसी कथाकृति—बाह्यजगत के बजाय अन्तर्जगत की कथा बयान करती है।

उपन्यास का केन्द्रीय पात्र कथानायिका मधु है, जो अपनी माँ को अपने आपबीती सुना रही है। भावनाओं की मंथर गतिमानता और उसका मद्धम स्पर्श यहाँ सिर्फ़ गुदगुदाता ही नहीं, आपको त्रासदियों में कई बार तन्हा भी छोड़ जाता है। यह त्रासदी सिर्फ़ मधु की निजी नहीं रह जाती। उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता है—इसके पात्रों के साथ पाठक की आत्मीय संलग्नता, जिसे उपन्यासकार की ललित शैली ने सम्भव बनाया है।

पाठक मणि के साथ भाव-लोक में इतना एकाकार हो उठता है कि उसे मणि का हर शब्द, हर अन्दाज़ अपना-सा लगता है। पाठक मणि के मनोजगत की यात्रा में शामिल होकर उसके साथ-साथ अपने भी अन्तरंग और सघन जीवनानुभवों के विभिन्न पहलुओं से रूबरू होता है। उपन्यास के हर शब्द में डूबता है, उतराता है। लेखक मूलतः कवि हैं सो उनकी शैली में कविता का प्रभाव पूरे कैनवस पर मौजूद है। इससे इसकी पठनीयता कई गुना बढ़ जाती है।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8171196187
Publication Year 2001
Edition Year 2001, Ed. 1st
Pages 91p
Price ₹35.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 0.5
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Kunwar Bechain

Author: Kunwar Bechain

कुँवर बेचैन

जन्म : 1 जुलाई, 1942; ग्राम—उमरी, ज़िला—मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश।

शिक्षा : एम.कॉम., एम.ए., पीएच.डी.।

एमएमएच, कॉलेज, ग़ाज़ि‍याबाद के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष रहे।

कुँवर बेचैन ने ग़ज़लों को आम आदमी के दैनिक जीवन से जोड़ा। यही कारण है कि वे नीरज के बाद मंच पर सराहे जानेवाले कवियों में अग्रगण्य रहे। उन्होंने गीतों में भी इसी परम्‍परा को क़ायम रखा। सात गीत-संग्रह, बारह ग़ज़ल-संग्रह, दो कविता-संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के रचयिता कुँवर बेचैन ने ग़ज़ल की संरचना को समझने के लिए ‘ग़ज़ल का व्याकरण’ पुस्तक भी लिखी।

उन्होंने कई विदेश यात्राएँ कीं और अनेक महत्‍त्‍वपूर्ण संस्थानों के साहित्य सम्मानों द्वारा सम्मानित हुए।

निधन : 29 अप्रैल, 2021

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