Manav Upayogi Ped

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Manav Upayogi Ped
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जल, जंगल, ज़मीन निस्सन्देह मानव जीवन के आधार हैं। हमें शुद्ध वायु पेड़-पौधे ही उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते पेड़-पौधों की उपेक्षा की गई और जंगल कटते चले गए जिसका ख़मियाजा मनुष्य असाध्य बीमारियों से लड़ते हुए भर रहा है। रामेश बेदी प्रकृति के विशेषज्ञ लेखक थे। यह पुस्तक विभिन्न पेड़ों की विभिन्न विशेषताओं से पाठक का परिचय कराती है।

इसमें मानव उपयोगी 8 वृक्षों—अर्जुन, चालमुग्रा, खैर, तुवरक, गाइनोकार्डिआ, भिलावा, गोरख इमली तथा हरड़ का वर्णन किया गया है। पुस्तक में पेड़ों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग  तथा औद्योगिक उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए रेखाचित्रों तथा तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो पुस्तक को पठनीय बनाते हैं।

पुस्तक न सिर्फ़ पेड़-पौधों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं,  अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन-अधिकारियों व वन-कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए उपयोगी है, वरन् आम जन के लिए स्वस्थ जीने के नुस्ख़े भी मुहैया कराती है।

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 2016, Ed. 4th
Pages 195p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
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Editorial Review

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Ramesh Bedi

Author: Ramesh Bedi

रामेश बेदी

बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न लेखक और प्रकृति के कुशल फ़ोटोग्राफ़र।

जन्म : 20 जून, 1915; कालाबाग़, उत्तर-पश्चिमी सीमा-प्रान्त (अब पाकिस्तान)।

शिक्षा : गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में अन्तेवासी के रूप में। जंगल के जीव-जन्तुओं के  अध्ययन, उनकी फ़ोटोग्राफ़ी तथा फ़‍िल्मिंग के दौरान श्री रामेश बेदी ने महीनों नेशनल पार्कों और अभयवनों में गुज़ारे। निरन्तर सान्निध्य से वन्य-जीवों के स्वभाव और उनकी संवेदनशील जीवन-शैली की बारीकियों को समझा। फलस्वरूप, ख़ूँख़ार समझे जानेवाले जानवरों और श्री बेदी के बीच की खाईं कमोबेश पट गई थी।

कृतियाँ : जीव-जन्तु विषयक पुस्तकें —‘आदमख़ोरों के बीच’, ‘गैंडा’, ‘सिंह’, ‘सिंहों के जंगल में’, ‘तेन्‍दुआ और चीता’, ‘कबूतर’, ‘गजराल’, ‘चरकसंहिता के जीव-जन्तु’, ‘जंगल की बातें’ आदि। वनस्पतियों सम्बन्धी पुस्तकें —‘गुणकारी फल’, ‘मानव उपयोगी पेड़’, ‘जंगल की जड़ी-बूटियाँ’, ‘जंगल के उपयोगी वृक्ष’ आदि। यात्रा-वृत्तान्त और कुछ अंग्रेज़ी की पुस्तकें भी प्रकाशित। कुछ पुस्तकें रूसी, पंजाबी, कन्नड़, ओड़िया, बंगाली, गुजराती, मराठी में अनूदित-प्रकाशित। अनेक लेख अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, जापानी, इतालवी, नेपाली, मराठी, मलयालम आदि में अनूदित-प्रकाशित।

यात्रा : अनुसन्धान कार्यों के सिलसिले में लन्दन, ब्राज़ील, कनाडा, भूटान और श्रीलंका की यात्रा।

सम्मान : हिन्दी अकादमी, दिल्ली और संस्कृत अकादमी, दिल्‍ली द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं ‘साहित्यिक कृति सम्मान’, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा ‘मेदिनी पुरस्कार’, ‘इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार’ (मरणोपरान्‍त) आदि।

निधन : 9 अप्रैल, 2003

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