Facebook Pixel

Mahashweta-Paper Back

Special Price ₹269.10 Regular Price ₹299.00
10% Off
In stock
SKU
9788171781997
- +
Share:
Codicon

सुविख्यात बांग्ला उपन्यासकार ताराशंकर बंद्योपाध्याय की यह पुस्तक कथावस्तु और रचना-शिल्प की दृष्टि से एक अनूठी और मार्मिक कथाकृति है।

माता-पिताविहीन नीरजा नामक एक बालिका का जैसा चरित्र-चित्रण यहाँ हुआ है, वह सिर्फ़ तारा बाबू जैसे कथाकार ही कर सकते हैं। पशुवत् मनुष्यों के लोभ, कुत्सा और समाज की कुरूपताओं से अनथक संघर्ष करती हुई नीरजा मानो तेजोद्दीप्त भारतीय नारी का प्रतीक बनकर उभरती है, जिसमें परदुख-कातरता भी है और उसके लिए आत्मोत्सर्ग की भावना भी। एक ओर वह अनाचार से जूझने के लिए जलती हुई मशाल है, तो दूसरी ओर उसके अन्तर में प्रेम की अन्तःसलिला प्रवाहित हो रही है। नारी की आत्मनिर्भरता उसके जीवन का मूलमंत्र है, जिसे वह सम्मानपूर्वक जीने की पहली शर्त मानती है। वस्तुतः तारा बाबू ने इस उपन्यास में स्थितियों और परिवेश को नाटकीयता प्रदान करके विलक्षण प्रभाव उत्पन्न किया है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1991
Edition Year 2025, Ed. 3rd
Pages 192p
Price ₹299.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Mahashweta-Paper Back
Your Rating
Tarashankar Bandyopadhyay

Author: Tarashankar Bandyopadhyay

ताराशंकर बंद्योपाध्याय

आपका जन्म वीरभूमि (बंगाल) के अन्तर्गत लाभपुर ग्राम के एक ज़मींदार परिवार में 23 जुलाई, 1898 में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद आप सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्रविष्ट हुए, किन्तु राजनीतिक हलचल से आपके अध्ययन में विघ्न पड़ा और आप अपने ग्राम में नज़रबन्द कर दिए गए। मुक्ति के बाद भी स्वास्थ्य गिर जाने के कारण आगे अध्ययन जारी न रखा जा सका। 1921 के असहयोग आन्दोलन में फिर कारावास हुआ। जेल से छूटने पर कुछ समय के लिए नौकरी की। तदनन्तर काव्य और नाटक के माध्यम से साहित्य में प्रवेश किया।

उपन्यास-क्षेत्र में आपने अद्वितीय सफलता प्राप्त की। प्रारम्भिक साहित्यिक जीवन में ही आपने अपने उपन्यास ‘हाँसुली बाँकेर उपकथा लिखकर ‘शरद-स्मृति पुरस्कार प्राप्त किया।

1956 में आपको ‘आरोग्य निकेतन’ उपन्यास के लिए साहित्‍य अकादेमी पुरस्‍कारसे इसी उपन्यास पर आपको ‘रवीन्द्र स्मारक पुरस्कारभी प्राप्त हुआ। ‘गणदेवता’ नामक उपन्यास पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।

14 सितम्‍बर, 1971 को कोलकाता में आपका निधन हुआ।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top