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Khoobsoorti Se Jeevan Jeene Ki Kala

Author: H.L. Maheshwari
Edition: 2025, Ed 2nd
Language: Hindi
Publisher: Funda (An imprint of Radhakrishna Prakashan)
As low as ₹179.10 Regular Price ₹199.00
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Khoobsoorti Se Jeevan Jeene Ki Kala

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ख़ुश रहने के लिए कुछ ज़्यादा करने की ज़रूरत नहीं है। बस सहज होने की कोशिश करें, और आप देखेंगे कि जिसे आप दु:ख मानकर अपनी ज़िन्दगी का उल्लास छोड़ बैठे हैं, उसमें भी एक सुख है। होनी को सरल भाव और खुले मन से स्वीकारें और आप देखेंगे कि आपकी इच्छाशक्ति आपको कहाँ ले जाती है। हँसिए और जब मन भर जाए तो खुलकर रोइए भी। रोना उतना बुरा नहीं है जितना माना जाता है, इससे आप नए हो जाते हैं। दिमाग़ से काम लें लेकिन दिल की भी सुनें, पुस्तकें पढ़कर अपनी कल्पना को नया आकाश दें, और ख़ुशी के परिन्दों के साथ उड़ें।

यह पुस्तक ऐसी ही छोटी-छोटी बातों से आपको जीना सिखाती है, ख़ुश रहना सिखाती है। और बताती है कि जीवन अपने आप में ही कितना सुखकारी, कितना अनमोल वरदान है; ज़रूरत है बस हिम्मत, धीरज और सहनशीलता के साथ उसे जीना सीखने की। आशा है, यह किताब इस राह में अवश्य ही आपकी हमसफ़र बनेगी।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2017
Edition Year 2025, Ed 2nd
Pages 112p
Publisher Funda (An imprint of Radhakrishna Prakashan)
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H.L. Maheshwari

Author: H.L. Maheshwari

डॉ. एच.एल. माहेश्वरी

मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसर एवं प्राचार्य के रूप में सेवा दे चुके डॉ. एच.एल. माहेश्वरी का जन्म 16 सितम्बर, 1937 को विदिशा, मध्यप्रदेश में हुआ। उन्होंने 42 वर्षों तक स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को पढ़ाया। उनके निर्देशन में कई छात्र-छात्राओं ने पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख और शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—कैसे छुएँ आसमान, आख़िर आत्महत्या क्यों?, खूबसूरती से जीवन जीने की कला, सुखी जीवन के प्रभावी सूत्र, जिएँ शानदार जिन्दगी 60 के बाद, रूकिए जरा—आत्महत्या से पहले, ढूँढ़ते रह जाओगे इंसानियत, खुशियों की चाबी आपके हाथ, क्या आप जिन्दा हैं?, टेंशन क्यों लेना?, कोरोना—क्यों कैसे करें सामना, सकारात्मकता—खुशियों का महामंत्र, सुख कहाँ—ढूँढ़ लिया ठिकाना।

निधन : 7 जून 2025

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