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Comrade Ka Coat-Paper Back

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9788171196548
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महत्त्वपूर्ण कथाकार सृंजय का यह पहला कहानी–संग्रह है। शीर्षक कथा ‘कामरेड का कोट’ भारतीय वामपन्थ पर तीक्ष्ण प्रहार करते हुए सच्चे और प्रतिबद्ध लोगों की बेचैनी को शिद्दत से उजागर करती है। वहीं ‘भगदत्त का हाथी’ हमारी गँवई ज़िन्दगी को आज भी निष्प्राण बनाए रखनेवाले सामन्ती अहंकार की बख़िया उधेड़ती है।

सृंजय की ये कहानियाँ हिन्दी कथा–साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान ग्रहण करती हैं। ये कहानियाँ पुन: इस सच को स्थापित करती हैं कि रचना का कलात्मक मूल्य उसकी सामाजिक अन्तर्दृष्टि में ही निहित होता है। संग्रह में शामिल ‘बैल बधिया’ और ‘तख़्त–ओ–ताज’ भी सामन्ती सरोकारों के चलते अमानवीय होती हमारी ज़िन्दगी की आलोचना करती हैं तो ‘लक्ष्मी के पाँव’ इस संस्कृति की विरूपता पर कटु व्यंग्य करती है।

कथाकार बेहद संवेदनशील है और समय को चौकन्नी दृष्टि से देखता है। लोक संस्कृति की गहरी समझ और रचनात्मक कौशल से उसका बेहतर इस्तेमाल कथाकार की ख़ूबी है। वह अपने पात्र समाज के बीचोबीच से उठाता है और उनके साथ चलते हुए उनकी तमाम कमज़ोरियों और कमियों को बारीकी से उकेरता है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8171196543
Publication Year 2001
Edition Year 2023, Ed. 2nd
Pages 155p
Price ₹199.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1
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Srinjay

Author: Srinjay

सृंजय

जन्म : 25 जनवरी, 1961 को भोजपुर जनपद (बिहार) के तेतरिया गाँव में।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी)।

शुरू में पिता के रूढ़िमुक्त मानवतावादी विचारों और ज्येष्ठ भ्राता श्री राधेश्याम मिश्र की समाजवादी विचारधारा और सादगीपूर्ण जीवन-शैली से गहरे प्रभावित, फिर आर्य समाज से जुड़ाव और देशाटन, और फिर वामपंथी श्रम संगठनों एवं दलों से गहरी सम्बद्धता। सन् 1984 से साहित्य की ओर प्रवृत्त।

प्रमुख कृतियाँ : ‘कामरेड का कोट, ‘नंगा’।

कुछ कहानियों का विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद।

आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से रचनाओं और वार्ताओं का प्रसारण।

सम्मान : ‘तख़्त-ओ-ताब’ कहानी पर सन् 1989 का ‘कृष्णप्रताप स्मृति पुरस्कार’।

सम्प्रति : सहायक निदेशक (राजभाषा), भारत संचार निगम लिमिटेड, आसनसोल।

 

 

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