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Kagaz Par Aag-Paper Back

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‘निर्भयता एक ज़िद है/हर डर के विरुद्ध’ कहने वाले वसंत सकरगाए अपनी कविताओं में इस निर्भयता को पूरी ज़िद के साथ निभाते भी हैं। सफ़ेदपोश समाज के अँधेरे कोने हों या राजनीति की दम्भी और जन-निरपेक्ष मुद्राएँ, उनका कवि अपनी बात बिना किसी डर के और साफ़-साफ़ शब्दों में कहता है।

इस संग्रह में शामिल वे कविताएँ जो उन्होंने देश के वर्तमान राजनीतिक हालात को देखते हुए लिखीं; उनके सरोकारों को भी दिखाती हैं, और उनकी निडरता को भी रेखांकित करती हैं। ‘बुलडोजर हमारा राष्ट्रीय यंत्र’, ‘पत्र वापसी के लिए आवेदन-पत्र’, ‘मेरे घर छापा पड़ा’ और ‘कान’ जैसी कविताएँ बताती हैं कि कवि ने इक्कीसवीं सदी के भारत के राजनीतिक-सामाजिक समय को कितनी स्पष्ट पक्षधरता और पीड़ा के साथ लेकिन बिना किसी भय के देखा है। उनकी इन जैसी कविताओं का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ कवि अरुण कमल कहते हैं कि “ये कविताएँ ब्रेष्ट और नागार्जुन की याद दिलाती हैं और सिद्ध करती हैं कि सही समझ, निर्भीकता और ईमानदारी से ही प्रतिरोध संभव है।”

प्रकृति, लोक, जन-गण की बोली-भाषा और उनमें रचे-बसे जीवन को वे जैसे वर्तमान की भयावहता के समक्ष एक विकल्प की तरह लेकर चलते हैं; और कवि के अपने संसार को भी जो उनके लिए एक सम्पूर्ण जगत है। आलोचक विजय बहादुर सिंह के शब्दों में “कविता ज़मीन की ही चिन्ता न करे बल्कि ज़मीन से अँखुवे की तरह फूटे और लहलहाए भी..., यह आपका कवि करता है।... अच्छा लगा कि आप कोई भंगिमा लेकर नहीं बल्कि जीवन के गवाह कवि के रूप में आते हैं।”

यह संग्रह निश्चय ही बृहत् हिन्दी समाज का ध्यान आकर्षित करेगा।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 112p
Price ₹199.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Vasant Sakargaye

Author: Vasant Sakargaye

वसन्त सकरगाए

वसन्त सकरगाए का जन्म 2 फरवरी, 1960 (वसंत पंचमी) को हरसूद (अब जलमग्न), जिला खंडवा, मध्य प्रदेश में हुआ।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘निगहबानी में फूल’, ‘पखेरु जानते हैं’, ‘काग़ज़ पर आग’ (कविता-संग्रह); ‘सुद में हरसूद’ (कथेतर गद्य)।

‘पखेरु जानते हैं’ संग्रह की ‘एक सन्दर्भ : भोपाल गैसकांड’ शीर्षक कविता जैन सम्भाव्य विश्वविद्यालय बेंगलुरू द्वारा स्नातक पाठ्यक्रम (2020-24) में शामिल।

बाल कविता : ‘धूप की सन्दूक’ केरल राज्य के माध्यमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल।

म.प्र. साहित्य अकादमी के ‘दुष्यन्त कुमार’, म.प्र. साहित्य सम्मेलन के ‘वागीश्वरी सम्मान’, ‘शिवना प्रकाशन अन्तरराष्ट्रीय कविता सम्मान’ तथा ‘अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन’ द्वारा साहित्यिक पत्रकारिता के लिए ‘संवादश्री’ सम्मान से सम्मानित।

ई-मेल : [email protected]

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