Facebook Pixel

Ka : Bhartiya Manas Aur Devataon Ki Kahaniyan-Paper Back

Special Price ₹405.00 Regular Price ₹450.00
10% Off
In stock
SKU
9788126717293
- +
Share:
Codicon

एक अद्भुत, रोमांचक और रहस्यपूर्ण यात्रा से अभी-अभी लौटा हूँ। सिर घूम रहा है— कुछ भी स्थिर नहीं। मैं उस विचित्र विचार-यात्रा के अनुभव आप सबके साथ बाँटना चाहता हूँ। एक में अनेक मानस यात्राएँ, लेकिन ज़रा ठहरिए, अभी-अभी जान पाया हूँ कि जिस अद्भुत यात्रा की बात कर रहा हूँ, वह तो शुरू ही नहीं हुई अभी तक। बस मन में कामना जगी है। और मैं इसी को यात्रा का आरम्भ और अन्त मान बैठा। सब गड्ड-मड्ड हो रहा है। प्रस्थान बिन्दु ही गन्तव्य है, और जिसे मैं गन्तव्य कह रहा हूँ, वही तो आरम्भ था। कोई आरम्भ प्रथम नहीं, क्योंकि वह दूसरा है, अन्त में से निकला है। जो नया है वह पिछले अन्त के अवशेष-शेष पर टिका है और अन्त भी अन्तिम सलिए नहीं कि वही आरम्भ है। मैं हूँ लेकिन नहीं भी हूँ। मेरा होना मेरे न होने में समाया है।

कहते हैं बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। बोधिसत्व बुद्धत्व प्राप्त कर अन्तिम बार जीवन-मरण के चक्र से निकलकर परे चले गए थे। लेकिन हम तक तो बुद्ध अपने अवशेष-आनन्द पर आधारित रहकर ही पहुँचे थे। यदि आनन्द न होते तो क्या हम बुद्ध के विचारों से इस तरह परिचित हो पाते? यही बात मैं इटली के भारत प्रेमी विद्वान श्री रॉबर्तो कलासो के बारे में कहना चाहता हूँ। संक्षेप में कहूँ तो कलासो के माध्यम से ही मैंने जटिल पुरातन भारतीय विचार-दर्शन को कथारस की लपेटन में पहली बार स्पर्श किया है। उसे पूरी तरह समझकर ग्रहण करने की परम स्थिति अभी दूर है। निर्वाण से पहले अनेक बार बोधिसत्व बनना होगा। प्रायः ही मेरे जैसे सामान्यजनों की दृष्टि अपने अतीत में पुराणों तक ही पहुँच पाती है। प्रागैतिहासिक वैदिक काल पवित्र अज्ञान की तरह है जिसे दूर से ही प्रणाम किया जा सकता है। पहले मन था, फिर विचार आया, विचार में से दूसरा विचार। सागर में लहर पर लहर की तरह जो तब से आज तक लगातार उठती जा रही हैं। और यह क्रम थमने वाला नहीं, अनन्त काल तक चलता जाएगा, उन चक्रीय कथाओं की तरह जो अश्वमेध के घोड़े के बलिस्थल पर लौटने की प्रतीक्षा में दस दिन के अन्तराल पर अपने को दोहराती चली जाती थीं।

इस पुस्तक को पढ़ते हुए ऐसी अनुभूति होती है मानो मैं एक चक्करदार झूले पर घूमता जा रहा हूँ। जो पहले था वही बार-बार दिखाई दे रहा है। आर्यों को ऐसा ही लगा था भारत-भूमि पर आगे बढ़ते हुए। न जाने क्यों ऐसा लगता था, जो नष्ट किया था, वही फिर से सामने प्रकट हो गया है और फिर ऐसा बार-बार होने लगा। वे चकित-चमत्कृत थे। फिर एक समय ऐसा आया, जब भारतीय विचार-दर्शन और जटिल कर्मकांडीय संयोजन की जटिलता ने मन को क्लान्त कर दिया। लोग चाहने लगे—गुनगुने सर्द मौसम में मद्धिम अलाव के चारों ओर बैठकर केवल रस-भरी कथाएँ सुनें और कुछ न करें। धीरे-धीरे यही क्रम चल निकला। जो कथाएँ संकोच से कर्मकांडीय अन्तराल के बीच चुपचाप सिमटकर आ बैठी थीं, वही प्रमुख हो गईं। अतीत के कर्मकांडीय सन्दर्भ कथा-विवरणों में ढल गए। इस पुस्तक के संयोजन में भी यही शैली अपनाई गई है। बात बिन्दु से उभरती है, विचार में ढलती है, विचार प्रक्रिया एक आवेशित, प्रचंड प्रवाह का रूप ले लेती है—लहरें इतनी ऊँची उठती हैं कि मन व्याकुल हो उठता है। और तभी कलासो कथा कहने लगते हैं। क़िस्सागोई का यह अन्दाज़ विचार-प्रवाह की गुरुता को कम नहीं करता उसे कहीं अधिक ग्राह्य बनाता है हम सभी के लिए।
श्री रॉबर्तो कलासो को बधाई। और उन जैसे भारत-प्रेमी विद्वान को जन्म देने के लिए इटली को धन्यवाद।

—देवेन्द्र कुमार

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2006
Edition Year 2011, Ed. 2nd
Pages 353p
Price ₹450.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Ka : Bhartiya Manas Aur Devataon Ki Kahaniyan-Paper Back
Your Rating
Roberto Calasso

Author: Roberto Calasso

रॉबर्तो कलासो

प्रसिद्ध इतालवी लेखक।

जन्म : 1941, फ़्लोरेंस (इटली)।

रॉबर्तो कलासो 1962 में रॉबर्तो बेजलेन तथा लुचियानो फोआ के नेतृत्ववाले उस समूह में शामिल हुए जो तब एक नया प्रकाशन गृह खोलने की दिशा में काम कर रहा था। जब एडेल्फी नाम से प्रकाशन संस्थान की शुरुआत हुई तो 1971 में कलासो को उसका प्रधान सम्पादक बनाया गया। आगे चलकर वे इस संस्थान के प्रबन्ध निदेशक बने। 1980 के दशक में उन्होंने मिथकों पर काम करना शुरू किया। इस शृंखला में अब तक उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, उनके एक उपन्यास और तीन निबन्ध-संग्रह भी प्रकाशित हैं।

कलासो ने अपने प्रकाशन संस्थान के लिए कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का अनुवाद भी किया है। वे ‘अमेरिकी अकादमी ऑफ़ आट् र्स एंड साइंसेज़’ के मानद सदस्य हैं। उनकी पुस्तकों का दुनिया की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

‘क : स्टोरीज ऑफ़ माइंड एंड गॉड्स ऑफ़ इंडिया’ तथा ‘द रुइन ऑफ़ कश’ हिन्दी में प्रकाशित।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top