Jab Jindagi Muskura Di

Memoirs
500%
() Reviews
As low as ₹300.00 Regular Price ₹400.00
You Save 25%
In stock
Only %1 left
SKU
Jab Jindagi Muskura Di
- +

बहुपठित युवा व्यंग्यकार के.डी. सिंह की यह किताब दरअसल जीवन की गुज़री राहों से कुछ यादगार टुकड़े समेटती है, जो लेखक के तो हैं ही, इसमें आप और हम भी होंगे। इन्हीं टुकड़ा-टुकड़ा स्मृतियों को सहेजती हुई ये किताब 'जब ज़‍िन्‍दगी मुस्कुरा दी' लेखक के चालीस वर्षों के सिंहावलोकन के कुछ पुंज, कुछ अपने, कुछ अपनों के अनुभव...अच्छे-बुरे लोगों के सानिध्य और कच्चे पक्के दुनियावी रास्तों से गुज़रते हुए, जीवन के कुछ अनमोल और न भूलनेवाले चित्रों का संकलन है, जो जीवन की स्मृतियों को सार्वजनिक तौर पर साझा करते हैं। ये संस्मरण हैं, स्मृति चित्र हैं...बीती ज़ि‍न्‍दगी के, पर जिनकी रोशनी आगे के जीवन-पथ को भी आलोकित करती है...

जाने कितना जीवन,

पीछे छूट गया अनजाने में

अब तो कुछ क़तरे हैं बाक़ी,

साँसों के पैमाने में...

इतना जान लिया तो यारो,

कैसी बन्दिश उनवाँ की

अपना-अपना रंग भरेगा,

हर कोई अफ़साने में....!!

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2020
Edition Year 2020, Ed. 1st
Pages 176p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
Write Your Own Review
You're reviewing:Jab Jindagi Muskura Di
Your Rating

Editorial Review

It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

K. D. Singh

Author: K. D. Singh

के.डी. सिंह

जन्म : 21 मार्च, 1975 को ग्राम—पिपरहरी, जनपद—बाँदा में।

शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा बाँदा में, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक एवं परास्नातक। 1992 में आकाशवाणी इलाहाबाद से ‘युववाणी’ कार्यक्रम में कविता-पाठ की एक नियमित शृंखला से जुड़े रहे, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए कविता, व्यंग्य-लेख व निबन्धों का प्रकाशन।

पुरस्कार : 1991 में महाकवि निराला संस्थान इलाहाबाद द्वारा पुरस्कृत, 1992 में प्रसिद्ध भाषाविद् हरदेव बाहरी द्वारा साहित्यिक संस्था ‘उदीयमान’ के तत्त्वावधान में ‘युवा रचनाकार उदीयमान सम्मान’, वर्ष 2004 में प्रकाशित पुस्तक 'शेष अगले पृष्ठ' पर के लिए उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा ‘बालकृष्ण शर्मा नामित पुरस्कार’, वर्ष 2012 में प्रकाशित व्यंग्य-संग्रह 'हाशिये पर' के लिए उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा ‘शरद जोशी सर्जना सम्मान’।

प्रकाशन : अब तक कुल 5 पुस्तकें प्रकाशित—'शेष अगले पृष्ठ पर' (व्यंग्य), 'हाशिये पर' (व्यंग्य), 'लिखना न था कुछ' (कविता एवं ग़ज़ल-संग्रह), 'होते करते' (व्यंग्य-संग्रह), 'एतद् द्वारा' (व्यंग्य-संग्रह)।

सम्प्रति : उ.प्र. सरकार के अधीन परिवहन विभाग में राजपत्रित अधिकारी।

ई-मेल : kd21375@gmail.com

Read More
Books by this Author

Back to Top