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Ichchaon Ke Jivashm-Paper Back

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उस्मान ख़ान की कविता उखड़े हुए नागरिक के एलिएनेशन की कविता है। आततायी राज्य, अन्याय, सत्तात्मक दम्भ, लूट, निर्बुद्धिकरण और कुबुद्धिकरण, राजनीतिक पतन, सामाजिक विषमता और विभाजन ने उस्मान को आन्दोलित कर रखा है। वे बेज़ार हैं। यह मामूली मोहभंग नहीं है। लेकिन यह ग़ैरमामूली असन्तोष उन्हें न तो निरुपाय बनाता है और न ही असंयत। उनके यहाँ भाषा एक बड़े उपाय में बदल जाती है। लोकतंत्र, सत्ता और समाज के स्लम को वर्णित करने के लिए उस्मान को ‘स्ट्रीट लैंग्वेज’ उपलब्ध होती जाती है जो हिन्दुस्तानी विपन्नता, दारिद्र्य, असहमति और बेदखली की अस्ल अभिव्यंजना है। इस जन भाषा, जो नई हिन्दुस्तानियत की द्रोह-भाषा सरीखी है, को पाने के बाद उस्मान ख़ान समकालीन हिन्दी के मध्यवर्गीय टकसाली भाषिक रूप-बन्ध को आहिस्ता से परे हटा देते हैं और अपने निहंग अनुभवों और देखन को किसी निचाट ज़बान के हवाले कर देते हैं। इसीलिए उस्मान को पढ़ना काफ़ी कुछ ख़ुसरो की याद दिलाता है। तब यह बात भी खुल जाती है कि कविता के अपने कारोबार में वह ला-सानी हैं। कोई उन जैसा नहीं, वह किसी जैसे नहीं। फिर भी मुक्तिबोध की चिन्ताओं और राजकमल की उखड़ी हुई साँसों वाली कविता का यदि कोई काव्याकार देखना हो तो उस्मान ख़ान की बेचैन चहलक़दमियों में वह दिख जाएगा। और अपनी इस बेचैनी में वह मुक्तिबोध की तरह एक बडे भूभाग में नहीं भटकते—उनकी दुविधाएँ और द्वन्द्व बेहद संघनित और आन्तरिक होने के साथ ही प्रतिरोधात्मक और वैचारिक होते जाते है। जीवन के नष्ट होने की वजह यदि जनविरोधी तंत्र है तो इसका विकल्प ढूँढ़ना पड़ेगा जो तुरत-फुरत तो हासिल नहीं हो सकता। कह लीजिए कि उस्मान सामूहिक आत्मन् के निर्माण को किसी सतत् धीरज का परिणाम मानने से विरत नहीं होते। विपत्तियों को देखने-समझने का जो हुनर उन्होंने हासिल किया है और फ़कीरी बेबाक़ी, बाँकपन और तंज़ के साथ कहने की जो शैली उन्होंने पा ली है, हिन्दी कविता के समकाल में वह बड़ी रचनात्मक उपलिब्ध है जो उस्मान की क़द-काठी को नायाब और अप्रतिम बनाती है और अपनी पीढ़ी का सबसे निराला राजनीतिक काव्य-व्यक्तित्व।

—देवी प्रसाद मिश्र 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 128p
Price ₹250.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Usman Khan

Author: Usman Khan

उस्मान ख़ान

उस्मान ख़ान का जन्म 12 जुलाई, 1984 को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में हुआ। शासकीय स्नातकोत्तर कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, रतलाम से स्नातक (जीव-विज्ञान) और स्नातकोत्तर (हिन्दी-साहित्य) किया। दो वर्ष कम्प्यूटर (हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर) का अध्ययन-अध्यापन। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एम.फ़िल. और पी-एच.डी. किया। पाँच वर्ष मध्य प्रदेश के महाविद्यालयों में अतिथि-विद्वान के बतौर अध्यापन किया। पिछले कुछ वर्षों से बरखेड़ी (रतलाम) में खेती और पशुपालन। इस बीच कुछ संस्थानों—नीपा (दिल्ली), अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन (भोपाल) के लिए नियमित तौर पर अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद कार्य।

‘आलोचना’, ‘वाक्’, ‘पहल’, ‘हंस’, ‘पक्षधर’, ‘सदानीरा’, ‘समयान्तर’, ‘हिन्दवी’ तथा ‘समालोचन’ आदि पत्रिकाओं और ब्लॉगों में कविताएँ, कहानियाँ और लेख प्रकाशित हैं। पक्षधर पत्रिका में प्रकाशित कहानी ‘टूटन’ के लिए वे ‘विजयमोहन सिंह कथा-स्मृति सम्मान’ से सम्मानित हैं।

ई-मेल : [email protected]  

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