‘हिन्दोस्तां हमारा’ के इस दूसरे भाग में हमने उर्दू की उन नज़्मों का एक संकलन दिया है जो शुरू से लेकर आज तक के राजनीतिक आन्दोलनों से सम्बन्ध रखती हैं। यह सच है कि उर्दू शाइरी ने हिन्दुस्तान के राजनीतिक इतिहास को पूर्ण रूप से अपने सीने में सुरक्षित कर रखा है। साथ ही, यह बात भी याद रखने योग्य है कि उर्दू शाइरी ने केवल राजनीतिक घटनाओं और स्थितियों के चित्र ही हमारे सामने पेश नहीं किए बल्कि हर युग के सामाजिक और राजनीतिक आन्दोलनों को बढ़ावा देने में उसका ज़बर्दस्त हाथ रहा।
प्राचीन शाइरों ने जो शहर–आशोब लिखे हैं उनमें अपने युग के चित्रण पर ही सन्तोष नहीं किया गया बल्कि कहीं-कहीं आलोचनात्मक दृष्टि भी डाली है। जैसे-जैसे उर्दू शाइरी आगे क़दम बढ़ाती गई उसमें वह मूल्य पैदा होते गए जो कल्पना और कला दोनों दृष्टि से उच्चस्तरीय शाइरी को जन्म देते हैं। यही नहीं, बल्कि सरदार जाफ़री के कथनानुसार—‘उर्दू वालों ने आज़ादी के संघर्ष को राष्ट्रीय परिधि तक सीमित नहीं रखा। उसके दायरे अन्तर्राष्ट्रीयता से मिलाए और इस प्रकार एक ज़्यादा जानदार और व्यापक चेतना को आम किया।’
—भूमिका से
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 1973 |
| Edition Year | 2026, Ed. 6th |
| Pages | 1053p |
| Price | ₹2,999.00 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14.5 X 6.5 |