Hindi Bhasha Ka Samajshastra

As low as ₹646.75 Regular Price ₹995.00
You Save 35%
In stock
Only %1 left
SKU
Hindi Bhasha Ka Samajshastra
- +

प्रो. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ने ‘हिन्दी भाषा का समाजशास्त्र’ पुस्तक की योजना ही नहीं, इसकी पूर्ण रूपरेखा भी अपने जीवन-काल में ही निर्मित कर ली थी। प्रस्तुत पुस्तक हिन्दी भाषा और उसकी बोलियों को व्यापक सामाजिक घटकों से सम्बद्ध करके देखती है। यह अध्ययन निश्चित ही हिन्दी भाषा-समुदाय से जुड़े अनेक प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत करता है।

अल्पसंख्यक भाषा-समुदायों की भाषाओँ का मिश्रण, स्थिर बहुभाषिकता का विकास, भाषा का मानकीकरण और आधुनिकीकरण, भाषा-विकास में भाषा-नियोजन की भूमिका आदि कुछ ऐसे ही प्रश्न हैं, जिन्हें हिन्दी भाषा-समाज को केन्द्र में रखकर प्रो. श्रीवास्तव ने उठाया है और उनकी विवेचना-व्याख्या की है। एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय कृति।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1994
Edition Year 2022, Ed. 5th
Pages 303p
Translator Not Selected
Editor Beena Shrivastava
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Hindi Bhasha Ka Samajshastra
Your Rating

Author: Ravindranath Shrivastava

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव


जन्म : 9 जुलाई, 1936 को बलिया (उ. प्र.) ।


लेनिनग्राद विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान में पीएच.डी.; अमेरिका में भाषा पर शोधकार्य के लिए पोस्ट–डॉक्टरल फ़ेलो; यूनेस्को (पेरिस), यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (टोकियो) आदि अन्तरराष्ट्रीय संगठनों में भाषा–शिक्षण सम्बन्धी कार्य–गोष्ठियों के विशेषज्ञ सदस्य; अमेरिका और इटली के विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में अध्यापन दिल्ली विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञान विभाग में प्रोफ़ेसर। शैलीविज्ञान, आलोचना, भाषा–शिक्षण, अनुवाद पर 6 पुस्तकें और रूसी, अंग्रेज़ी एवं हिन्दी में प्रकाशित अनेक लेख।


सम्पूर्ण लेख पाँच खंडों में—‘हिन्दी भाषा का समाजशास्त्र’, ‘हिन्दी भाषा : संरचना के विविध आयाम’, ‘भाषाविज्ञान : सैद्धान्तिक चिन्तन’, ‘अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान : सिद्धान्त एवं प्रयोग', ‘साहित्य का भाषिक चिन्तन’।

निधन : 3 अक्टूबर, 1992

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top