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Grameen Swachchhata-Hard Cover

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9789382193098
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मुअनजोदड़ो सभ्यता से लेकर आज तक मल-मूत्र विसर्जन के सुरक्षित तथा स्वास्थ्य के लिए कम हानिकारक उपायों की खोज होती आ रही है। जनसंख्या-वृद्धि के साथ यह समस्या और गम्भीर हुई है, साथ ही ग्रामीण इलाक़ों में पर्याप्त जागरूकता के अभाव के चलते जन-स्वास्थ्य के लिए इसने कई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।

यह पुस्तक आज़ादी के बाद से भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में होनेवाले स्वच्छता-प्रयासों पर बात करते हुए उन तमाम प्रविधियों पर बात करती है जिनका प्रयोग देश के विशाल ग्रामीण भू-भाग में स्वच्छता को सम्भव बनाने के लिए किया जा सकता है।

स्वच्छता क्यों ज़रूरी है? मल-मूत्र निपटान के आधुनिक और प्रौद्योगिकीय विकल्प क्या हैं? गोबर गैस संयंत्र की इसमें क्या भूमिका रही और क्या हो सकती है, विभिन्न सांस्कृतिक और विविध जीवन-शैलियों के हमारे समाज में स्वच्छता के प्रति सजगता के लिए कैसा अभियान चाहिए, उसके लिए काम करनेवाले लोगों का प्रशिक्षण कैसे हो, एक-एक व्यक्ति को स्वच्छता और स्वास्थ्य के विषय में कैसे समझाया-बताया जाए, यह पुस्तक इन विषयों पर आँकड़ों, तथ्यों और विस्तार के साथ बात करती है।

स्वच्‍छता के प्रति इधर सरकार का आग्रह भी और बढ़ा है, इस सन्दर्भ में यह पुस्तक विशेष रूप से पठनीय और अनुकरणीय है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2019
Edition Year 2019, Ed. 1st
Pages 96p
Price ₹300.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1
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Mukesh Kumar

Author: Mukesh Kumar

डॉ. मुकेश कुमार 

डॉ. मुकेश कुमार ने दूरदर्शन की लोकप्रिय समाचार पत्रिका ‘परख’ से टीवी पत्रकारिता के सफ़र की शुरुआत की। साप्ताहिक पत्रिका ‘फ़िलहाल’ एवं टॉक शो ‘कही-अनकही’ का निर्देशन एवं संचालन किया। दूरदर्शन के बहुचर्चित ब्रेकफास्ट शो ‘सुबह सवेरे’ ने उन्हें राष्ट्रव्यापी ख्याति दिलाई। उन्होंने टीवी टुडे द्वारा निर्मित डॉक्यू ड्रामा ‘आज की नारी’ के लिए पटकथा भी लिखी। उन्हें छह न्यूज़ चैनल शुरू करने का श्रेय जाता है। प्राइम टाइम एंकर के तौर पर वे लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित कार्यक्रम ‘स्पेशल एजेंडा’, ‘राजनीति’, ‘बात बोलेगी’, ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘सम्मुख’, ‘फ़िलहाल’, ‘कही अनकही’ आदि भी प्रस्तुत करते रहे। वृत्तचित्रों, टेलीफिल्म और टॉक शो का भी निर्माण किया। टेलीफिल्म ‘कंठा’ के लिए पटकथा एवं संवाद लेखन, सह निर्देशन के साथ-साथ अभिनय भी किया और ‘उल्टा-पुल्टा’ नामक शॉर्ट फिल्म भी बनाई।

वे साहित्यिक पत्रिकाओं ‘हंस’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘पाखी’, ‘दुनिया इन दिनों’ समेत कई पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबसाइट के लिए स्तम्भ लेखन करते रहे हैं। अब तक उनकी बारह किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल में प्रकाशित ‘मीडिया का मायाजाल और टीआरपी’, ‘टीवी न्यूज़ और बाज़ार’ उनकी अत्यधिक चर्चित किताबों में से हैं। उनका कविता संग्रह ‘साधो जग बौराना’ भी काफी सराहा गया। उनकी अन्य किताबें हैं : ‘दासता के बारह बरस’, ‘भारत की आत्मा’, ‘लहूलुहान अफ़गानिस्तान, ‘कसौटी पर मीडिया’, ‘टेलीविज़न की कहानी’, ‘ख़बरें विस्तार से’, ‘चैनलों के चेहरे’, ‘मीडिया मंथन’, ‘फ़ेक एनकाउंटर’।

वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एडजंक्ट प्रोफेसर एवं एसजीटी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एवं डीन रह चुके हैं। फिलहाल सत्यहिन्दी डाट कॉम के सलाहकार सम्पादक हैं।

ईमेल : [email protected]

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