Ek Ladki Ki Zindagi

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Ek Ladki Ki Zindagi
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दुल्हन रुख़सत होकर जा चुकी थी। मंझली खाला कोनों में मुँह छिपाकर रोती फिर रही थी। बड़े भैया बार-बार आँसू पीने की कोशिश कर रहे थे। लोगों के उठने के बाद शामियाने के नीचे सोफ़े अब ज़रा बेतरतीबी से पड़े थे। कारचोबी मसनद पर जहाँ निकाह और बाद में आरसी मुसहिफ़ हुआ था, अब बच्चे कूद रहे थे और फूलों के हार बिखरे पड़े थे। मीरासनें गाते-गाते थक चुकी थीं। शहर की ‘ऊँची सोसाइटी’ के अफ़राद मेजबानों को ख़ुदा हाफ़िज़ करके मोटरों में सवार हो रहे थे। बिलकिस रिश्तेदारों के हुजूम में अन्दर बैठी ज़ोर-ज़ोर से हँस रही थी। स्याह शेरवानी और चूड़ीदार पाजामे में मलबूस उसका कज़िन मेहमानों को सिगरेट पेश करते-करते उकताकर सोफ़े पर बैठ गया था। उसकी भाभीजान शामियाने के एक कोने में उसके दोस्तों के हुजूम में खड़ी मसल-ए-कश्मीर पर धुआँधार तकरीर कर रही थी। ‘यह हमारा पटरा करवाएँगी’—नादिर ने ज़रा परेशानी से सोचा और फिर कॉफ़ी मँगवाने के लिए कोठी के अन्दर चला गया।

वह उसी तरह कड़ी बहस में उलझ रही थी जब एक शानदार शख़्स हाथ में कॉफ़ी की प्याली लिए उसके क़रीब से गुज़रा और उसे देखकर बड़ी उदासी से मुस्कराया, गोया उसकी आँखों में तैरते बेपायाँ अलम को समझता हो या समझने की कोशिश कर रहा हो।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 1996
Edition Year 2015, Ed. 2nd
Pages 183p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
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Editorial Review

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Qurratul Ain Haider

Author: Qurratul Ain Haider

क़ुर्रतुल ऐन हैदर

 

जन्म : 1927 में अलीगढ़ में। लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में एम.ए.। अंग्रेज़ी पत्रिका 'इम्प्रिंट’ और 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया’ में कई वर्षों तक कार्य किया। उर्दू की नई कहानी को शुरू करनेवालों में से एक सुश्री हैदर का पहला कहानी-संग्रह ‘सितारों से आगे’ सन् 1947 में छपा। कहानी-संग्रह ‘पतझड़ की आवाज़’ पर वर्ष 1967 का ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’। इसके अतिरिक्त अनुवाद के लिए ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ (1969), ‘पद्मश्री’ (1984), ‘ग़ालिब मोदी अवार्ड’ (1984), ‘इक़बाल सम्मान’ (1987), ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ (1991) आदि से सम्मानित। 1994 में साहित्य अकादमी का ‘फ़ेलो’ बनाया गया।

प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास—‘मेरे भी सनमख़ाने’ (1949), ‘सफ़ीन-ए-ग़म-ए-दिल’ (1953), ‘आग का दरिया’ (1959), ‘कार-ए-जहाँ दराज़’ (1979), ‘निशान्‍त के सहयात्री’ (‘आख़ि‍र-ए-शब के हमसफ़र’ का रूपान्तर, 1979), ‘गर्दिश-ए-रंग-ए-चमन’ (1987), ‘चाँदनी बेगम’ (1990), ‘चाय के बाग़’ और ‘अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो’; कहानी-संग्रह—‘सितारों से आगे’ (1947), ‘शीशे के घर’ (1953), ‘पतझड़ की आवाज़’ (1966), ‘रौशनी की रफ़्तार’ (1981), ‘यह दाग़-दाग़ उजाला’ (1971); रिपोर्ताज़—‘कोहे दमावन’ (ईरान), ‘गुलगस्त’ (सोवियत संघ), ‘सितम्‍बर का चाँद’ (जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया), ‘जहान-ए-दीगर’ (अमरीका)।

निधन : 2007 में 80 साल की उम्र में निधन।

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