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Dukhiyare

Author: Anis Ashfaq
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Dukhiyare

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वे ख़ुशियाँ, वे खिलखिलाहटें, वे रौनक़ें जिनसे लखनऊ कभी आबाद होता था, मुरझाती हुई धीरे-धीरे उदासियों में बदल गईं। कुछ हवेलियाँ बिक गईं, कुछ नीलाम और कुर्क हो गईं। खानदान जिनकी उपमा सितारों से दी जाती थी, वक़्त और अपनी लापरवाहियों से पिटते-पिटते सड़कों पर आ गए, सड़कों पर भी जगह न रही, तो पब्लिक मैदानों में जा टिके...कर्बलाओं, इमामबाड़ों और मस्जिदों में सिर छुपाते घूमने लगे।

ये कहानी इसी दुखियारे वक़्त की है। एक भाई हैं जो छोटे भाइयों के मुक़ाबले अपनी माँ के बहुत लाडले हैं लेकिन उनके दिमाग़ में ख़लल है, बेचैनी कहीं टिकने नहीं देती...वक़्तन-फ़-वक़्तन कुछ औल-फौल बोलने लगते हैं, अपने ख़्वाबों की हवेलियों के नक्शे खींचने लगते हैं और कभी भी किधर भी निकल जाते हैं, छोटे भाई उनको ढूँढ़ते रहते हैं, जब मिलते हैं तो घर भी ले आते हैं, लेकिन बड़े फिर किसी दिन कोई पर्चा छोड़कर ग़ायब हो जाते हैं...

शुरू से आख़िर तक यही सिलसिला चलता रहता है, खो जाने और मिल जाने का, और इस लामहदूद–से लगने वाले सफ़र में पुराने लखनऊ का इतिहास और भूगोल हमारी आँखों के सामने से गुज़रता जाता है, उस दुख को दर्ज करता हुआ जिन्हें वक़्त अपने उतरते दिनों की झोली में डालकर कभी न लौटने के लिए चला जाता है... 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 168p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Anis Ashfaq

Author: Anis Ashfaq

अनीस अशफ़ाक़

अनीस अशफ़ाक़ का जन्म 30 जून, 1950 को हुआ। उन्होंने तीस से अधिक वर्षों तक लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में अध्यापन किया और सोलह से अधिक वर्षों तक उसी विभाग के विभागाध्यक्ष रहकर 2012 में सेवानिवृत्त हुए। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘अदब की बातें’, ‘ग़ज़ल का नया अलामती निज़ाम’, ‘उर्दू ग़ज़ल में अलामत  निगारी’ (प्रतिबिम्बवाद), ‘बहस-ओ-तनक़ीद’, ‘ग़ालिब दुनयाए मआनी का मुतालिआ’, ‘दरिया के रंग’, ‘सीधी बातें सादा मतालिब’, ‘ग़ज़ल का नया अलामती निज़ाम’ (आलोचना); ‘दुख्यारे’, ‘ख़्वाब‌ सराब’, ‘परीनाज़ और परिन्दे’, ‘हेच’ (उपन्यास); ‘कत्बे पढ़ने वाले’ (कहानी-संग्रह); ‘एक नैज़ा खूने दिल’, ‘सुबहे खुर्शीदे ज़वाल’ (कविता-संग्रह); ख़ुशबू-ए-ख़ाक़’ (रिपोतार्ज); ‘दर शहरे दोस्तदाराँ’ (यात्रा-वृत्तान्त); ‘नैयर मसऊद हम : रंग हम : दाँ’ (जीवनी); ‘तरजुमे और मुकालमे’ (अनुवाद-साक्षात्कार); ‘इन्तेख़ाबे कायम’ (कायम चाँदपुरी), ‘इन्तेख़ाबे यगाना’ (यगाना चँगेज़ी), (चयन); ‘रूहे अनीस : मसऊद हसन, रिज़वी’, ‘फरहंगे अमसाल : मसऊद हसन रिज़वी’ (सम्पादन); ‘कव्वे और काला पानी’ (निर्मल वर्मा) (अनुुवाद); ‘मसऊद हसन रिज़वी’ (मोनोग्राफ़)। उन्होंने दुनिया के कई देशों में अपने आलोचनात्मक आलेख प्रस्तुत किए हैं और साहित्यिक समारोहों की अध्यक्षता भी की है।

उन्हें ‘अन्तरराष्ट्रीय ग़ालिब अवार्ड’, ‘इक़बाल सम्मान’ सहित ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ और कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected] 

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