Facebook Pixel

Devdas-Hard Cover

Special Price ₹382.50 Regular Price ₹450.00
15% Off
Out of stock
SKU
9788183615051
Share:
Codicon

‘देवदास’ शरतचन्द्र का पहला उपन्यास है। लिखे जाने के सोलह साल बाद तक यह अप्रकाशित रहा। शरत स्वयं इसके प्रकाशन के लिए उत्साही नहीं थे, लेकिन 1917 ई. में इसके छपने के साथ ही व्यापक रूप से इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। विभिन्न भारतीय भाषाओं में इसके अनेक अनुवाद हुए। अनेक भारतीय भाषाओं में इस पर फ़िल्में बनीं। आख़िर ‘देवदास’ की इतनी लोकप्रियता के क्या कारण हैं? यह कृति क्यों कालजयी बन गई? असल में ‘देवदास’ सामन्ती ढाँचेवाले भारतीय समाज में घटित एक ऐसी प्रेमकथा है जिसमें गहरी संवेदनशीलता है। शरत ने उसे इतनी अन्तरंगता से लिखा है कि ‘देवदास’ की कहानी में सबको कहीं-न-कहीं अपनी ज़िन्दगी भी दिखाई दे जाती है। ‘देवदास’ भारतीय समाज-व्यवस्था की अनेक विसंगतियों पर एक कड़ी टिप्पणी भी है।

पत्रकार सुरेश शर्मा ने ‘देवदास’ की विस्तृत भूमिका में पहली बार इस कृति और उसके सर्जक शरतचन्द्र के बारे में अनेक नई जानकारियाँ दी हैं। यह भूमिका न सिर्फ़ इस कृति का नया मूल्यांकन करती है, बल्कि इस बात की भी तलाश करती है कि ‘देवदास’ की पारो और चन्द्रमुखी कौन थी? शरत को ये पात्र जीवन में कहाँ और कब मिले?—इन जानकारियों के साथ ‘देवदास’ को पढ़ना उसमें नया अर्थ पैदा करेगा।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Vimal Mishra
Editor Not Selected
Publication Year 2012
Edition Year 2023, Ed. 4th
Pages 120p
Price ₹450.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Devdas-Hard Cover
Your Rating
Sharatchandra

Author: Sharatchandra

शरतचन्द्र

जन्म : 15 सितम्बर, 1876 को हुगली ज़िले के देवानंदपुर (पश्चिम बंगाल) में हुआ।

प्रमुख कृतियाँ : ‘पंडित मोशाय’, ‘बैकुंठेर बिल’, ‘मेज दीदी’, ‘दर्पचूर्ण’, ‘श्रीकान्त’, ‘अरक्षणीया’, ‘निष्कृति’, ‘मामलार फल’, ‘गृहदाह’, ‘शेष प्रश्न’, ‘देवदास’, ‘बाम्हन की लड़की’, ‘विप्रदास’, ‘देना पावना’, ‘पथेर दाबी’ और ‘चरित्रहीन’।

‘चरित्रहीन’ पर आधारित 1974 में फ़िल्म बनी थी। ‘देवदास’ फ़िल्म का निर्माण तीन बार हो चुका है। इसके अतिरिक्त ‘परिणीता’ 1953 और 2005 में, ‘बड़ी दीदी’ (1969) तथा ‘मँझली बहन’ आदि पर भी चलचित्रों के निर्माण हुए हैं। ‘श्रीकान्त’ पर टी.वी. सीरियल भी बन चुका है।

निधन : 16 जनवरी, 1938

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top