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Curfew Ki Raat-Paper Back

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शहादत की कहानियाँ हिन्दुस्तान के ज़मीनी यथार्थ का वो चेहरा पेश करती हैं, जो निरन्तर बदल रहा है। हिन्दुस्तान, जिसका सांस्कृतिक बोध एक तरफ़ बहुसंस्कृति के सौन्दर्य को प्रकट करता है तो दूसरी तरफ़ साम्प्रदायिक विद्वेष की उस कुरूपता की शिनाख़्त भी करता चलता है, जो हिन्दुस्तान को एक विभाजित जनसंख्या और धार्मिक पहचान के आधार पर प्रताड़ित मनुष्यता में तब्दील करना चाहता है। मानवीय समाज की धड़कन सुनते इस कथाकार के क़िस्सों में मुस्लिम समुदाय के कई सवाल अंडरकरंट की तरह पाठक को झकझोरते हैं। उन्हें पेश करता कहानीकार मुस्लिम समुदाय की रूढ़िवादिता का भी खुलकर बयान करता है। 

कहानीकार के रचना संसार में आम जीवन ख़ूब धड़कता है, जिसे रचनाकार बहुत बारीकी से सामने ले आता है। इसमें वे तमाम पूर्वाग्रह भी आ जाते हैं, जो इनसान को किन्हीं ख़ास पहचानों में सीमित करके उनकी सहजता ख़त्म कर देते हैं। ग़ौरतलब है कि पूर्वाग्रही व्यक्ति तो पहले ही असहज है और वह जिनके प्रति पूर्वाग्रही है उनकी दुनिया को भी असहज कर देता है। इस तरह अनेक असहजताएँ दुनिया के बड़े हिस्से में विस्तार पाकर इनसान को बौना कर देती हैं। यह बौनापन सब तरफ के लोगों से उनका इनसान होना छीन रहा है। ‘कर्फ़्यू की रात’ संग्रह की कहानियाँ इस बात की तस्दीक़ करती हैं।

— प्रज्ञा रोहिणी

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 160p
Price ₹250.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Shahadat

Author: Shahadat

शहादत

शहादत का जन्म 14 अप्रैल, 1995 को बड़ौत, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी पत्रकारिता में स्नातक और हिन्दी में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। उर्दू शायरी की वेबसाइट रेख़्ता, लॉ वेबसाइट लाइवलॉ और एनडीटीवी में भी कार्य किया।

उनके प्रकाशित कहानी-संग्रह हैं—‘आधे सफ़र का हमसफ़र’ और ‘कर्फ़्यू की रात’। लेखन के अलावा उनकी रुचि अनुवाद में भी रही है। उन्होंने ‘दास्तान-ए-1857’ और मशहूर पाकिस्तानी कहानीकार हिजाब इम्तियाज़ अली के कहानी-संग्रह ‘सनोबर के साये’ का अनुवाद किया है।

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