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Chhichhorebaji Ka Resolution

Author: Piyush Pandey
Edition: 2012, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Chhichhorebaji Ka Resolution

पीयूष पांडे का व्यंग्य-लेखन एकदम नई तरह का इसलिए नहीं है कि ये ख़ुद नए हैं, बल्कि इसलिए नया है कि इनकी चेतना एकदम आधुनिक है। एकदम छोटे बच्चे भी पर्याप्त बूढ़े हो सकते हैं चेतना के स्तर पर। और एकदम बूढ़े भी बच्चे हो सकते हैं चेतना के स्तर पर। पीयूष पांडे ने व्यंग्य के विषय तलाशे नहीं हैं, विषय उनके आसपास टहल रहे हैं। एसएमएस, फेसबुक, मजनूँ से लेकर पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था तक के विषय उनके व्यंग्य लेखन में हैं। विषयों की तलाश व्यंग्यकारों को परेशान करती है। पर पीयूष पांडे उस परेशानी से जूझते नहीं दिखते। जो भी विषय है, उस पर अपनी दृष्टि से लिखो, व्यंग्य हो जाएगा, वह इस सिद्धान्त पर अमल करते हुए दिखते हैं। पर पीयूष पांडे के व्यंग्य की ख़ास बात यह है कि वह व्यंग्य लेखों का इस्तेमाल सिर्फ़ हँसाने के लिए नहीं करते। इधर, व्यंग्यकारों की बहुत बड़ी फ़ौज इस तरह के सिद्धान्त पर काम कर रही है कि किसी भी गद्य में हँसने के चार-छह मौक़े धर दो, व्यंग्य हो जाएगा। व्यंग्यकारों का एक बड़ा वर्ग इसके उलट यह भी मानता है कि व्यंग्य को हँसने-हँसाने का काम तो करना ही नहीं चाहिए।

पीयूष एक सीधे रास्ते पर चलते हैं। स्थितियों को जैसी हैं, वैसी हैं, उन्हें पेश कर देते हैं। उनमें हँसी का स्कोप है, तो हँस लीजिए। पर बेवजह हँसाने की कोशिश नहीं है। मोबाइल, फेसबुक जैसी आसपास इतनी आधुनिक चीज़ें हैं कि ख़ास तौर पर शिक्षित युवा इनसे मुक्त नहीं रह सकते। कई तरह की स्थितियाँ व्यंग्य बन रही हैं। एक तरह से देखें, तो पीयूष पांडे की यह किताब नए बनते व्यंग्य का आईना है। बदलती परिस्थितियों का आईना है, जो कि व्यंग्य को होना चाहिए। पीयूष ख़ुद मीडिया से जुड़े हुए हैं, इसलिए मीडिया की आन्तरिक परिस्थितियों को बख़ूबी समझते हैं। इस पुस्तक में मीडिया पर कुछ शानदार व्यंग्य लेख हैं। मीडिया कैसी मदारीगिरी में बिजी है, यह बात इस पुस्तक में बार-बार सामने आती है।

वास्तविक दुनिया में वर्चुअल दुनिया यानी आभासी दुनिया किस तरह से प्रवेश करती है, इस पुस्तक में बार-बार दिखाई देता है। कुल मिलाकर कहें, तो यह नए ज़माने के व्यंग्य की किताब है। जो कई तरह के नए मानकों का निर्माण करेगी। व्यंग्य के नए और पुराने छात्रों को इस किताब को पढ़ना चाहिए, ऐसी मेरी रिकमंडेशन है। इसे पढ़ना सब लोग रिजोल्यूशन बनाएँगे, ये मेरी शुभकामना है।

—आलोक पुराणिक

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2012
Edition Year 2012, Ed. 1st
Pages 92p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Piyush Pandey

Author: Piyush Pandey

पीयूष पांडे

जन्म : 7 अक्टूबर, 1978; दिल्ली।
शिक्षा : मास्टर ऑफ़ जर्नलिज़्म और मास्टर ऑफ़ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट।
सोशल मीडिया पर नियमित लेखन के बीच कसक उठे तो व्यंग्य-लेखन। ‘दैनिक ट्रिब्यून’, चंडीगढ़; ‘जागरण आईनेक्स्ट’, ‘प्रभात ख़बर’, ‘स्वतंत्र वार्ता’, हैदराबाद; जैसे समाचार-पत्रों और ब्लॉग व वेबसाइट्स के लिए व्यंग्य-लेखन। ‘नवभारत टाइम्स’ ऑनलाइन की शुरुआत के दौरान मुख्य टीम में रहे और फिर तीन साल सँभाला। ‘आज तक’ और ‘सहारा समय’ जैसे टेलीविज़न चैनलों में काम किया, लेकिन मन का एक कोना फ़िल्मों से जुड़ा रहा है, इसलिए इन दिनों फ़िल्म में बतौर सहायक निर्देशक काम और जल्द ही अपनी फ़िल्म के निर्देशन की योजना।
सम्प्रति : स्वतंत्र पत्रकार, सहायक निर्देशक और ओजस सॉफ़्टेक प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक।

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