Bolna Hi Hai

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Bolna Hi Hai
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रवीश कुमार की यह किताब ‘बोलना ही है’ इस बात की पड़ताल करती है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किस-किस रूप में बाधित हुई है, परस्पर संवाद और सार्थक बहस की गुंजाइश कैसे कम हुई है और इससे देश में नफ़रत और असहिष्णुता को कैसे बढ़ावा मिला है। कैसे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि, मीडिया और अन्य संस्थान एक मज़बूत लोकतंत्र के रूप में हमें विफल कर रहे हैं। इन स्थितियों से उबरने की राह खोजती यह किताब हमारे वर्तमान समय का वह दस्तावेज़ है जो स्वस्थ लोकतंत्र के हर हिमायती के लिए संग्रहणीय है।

हिन्दी में आने से पहले ही यह किताब अंग्रेज़ी, मराठी और कन्नड़ में प्रकाशित हो चुकी है।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2021, Ed. 3rd
Pages 212p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 19.5 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Ravish Kumar

Author: Ravish Kumar

रवीश कुमार

आमतौर पर लोगों के दिलों में ‘एनडीटीवी वाले रवीश’ के नाम से एक बड़ी पहचान। बिहार के मोतिहारी ज़‍िले के गाँव जितवारपुर से चलकर दिल्ली शहर में ‘स्थायी पता’ की तलाश करनेवाले। लप्रेक का नया कॉन्सेप्ट शुरू करनेवाले। ‘क़स्बा’ के ब्लॉगर। आज के हमारे समय में इनका सबसे बड़ा परिचय—‘रवीश की रिपोर्ट’ वाले, ‘प्राइम टाइम’ वाले रवीश कुमार। हिन्‍दी में पहली किताब ‘इश्क़ में शहर होना’ नाम से छपी, जिसका बाद में अंग्रेज़ी अनुवाद ‘अ सिटी हैप्पेंस इन लव’ नाम से प्रकाशित हुआ है। 2018 में अंग्रेज़ी में पहली किताब ‘द फ्री वॉइस’ नाम से प्रकाशित हुई जो मराठी और कन्नड़ में भी अनूदित हो चुकी है। अब यही किताब ‘बोलना ही है’ नाम से राजकमल प्रकाशन के उपक्रम ‘सार्थक’ से प्रकाशित।

‘रेमन मैगसेसे पुरस्‍कार’, ‘राजकमल प्रकाशन सृजनात्‍मक गद्य सम्‍मान’, ‘रामनाथ गोयनका अवार्ड’, ‘राष्‍ट्रीय शरद जोशी सम्‍मान’ आदि से सम्‍मानित।

 

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