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Bhootgaon-Paper Back

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हिन्दी के वरिष्ठ कवि-गद्यकार लीलाधर मंडलोई की यह आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ केवल उनकी नहीं बल्कि सतपुड़ा के जंगलों में विस्थापित होकर पहुँचे खान-मज़दूरों, दलित-अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की भी कथा है। कोरकू, गोंड़ और भारिया आदिवासियों के जीवन के स्याह चित्र भी इसमें आपको मिलेंगे।

वेस्टर्न कोल्ड फ़ील्ड के छिन्दवाड़ा और दमुआ जिलों में कोयला-खानों की एक बड़ी शृंखला है। एक में कोयला ख़त्म हुआ तो दूसरी, तीसरी, चौथी और यह प्रक्रिया चलती रहती है जिसमें मज़दूरों को बार-बार उजड़ना पड़ता है। न पक्की नौकरी, न अस्पताल, न स्कूल, न मकान; बस भूख, ग़रीबी, अकाल मृत्यु, दुर्घटनाएँ और दुखों का असीम संसार।

ओपनकास्ट और अंडर ग्राऊंड खदानों में बाल-मज़दूर का जीवन जीते हुए लेखक ने यह सब बचपन में ही देख-जी लिया था। आस-पास का जीवन त्रासद था लेकिन जीवन की प्रतिकूलताओं में बनी सामुदायिकता ने वहाँ संघर्ष, जिजीविषा और आनन्द की एक पारिस्थितिकी भी निर्मित की थी जिसमें गोंडवाना, बुन्देलखंड और बाहर से आए लोगों की बोली-बानी, भाषा, खानपान, रहन-सहन और संगीत की समावेशी संस्कृति दिखाई देती थी। इस आत्मकथा को पढ़ते हुए हम जान पाते हैं कि खदानों की गहराइयों ने खदानों को कैसे खोखला कर दिया, कैसे जल-स्तर हज़ारों फ़ीट नीचे चला गया, पानी का संकट गहराया और जंगल उजड़ने लगा। जंगल का जीव-जगत समाप्त होने लगा। कई प्रजातियाँ खो गईं। आदिवासियों का विस्थापन शुरु हुआ। उनकी संस्कृति लुप्त होने लगी।

इसके अलावा प्राइवेट कम्पनी के कार्यकाल में शोषण, अनाचार, उपेक्षा, शोषण आदि के आख्यान भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 246p
Price ₹299.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Naveen Joshi

Author: Naveen Joshi

नवीन जोशी

नवीन जोशी पिथौरागढ़, उत्तराखंड के सुदूर गाँव रैंतोली के मूल निवासी हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई लखनऊ में हुई। विभिन्न समाचार-पत्रों में उन्होंने 38 वर्ष तक पत्रकारिता की है। ‘हिन्दुस्तान’ के कार्यकारी सम्पादक पद से सेवानिवृत्त हुए।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘दावानल’, ‘टिकटशुदा रुक्का’, ‘देवभूमि डेवलपर्स’, ‘भूतगाँव’ (उपन्यास); ‘अपने मोर्चे पर’, ‘राजधानी की शिकार कथा’ और ‘बाघैन’ (कहानी-संग्रह); ‘मीडिया और मुद्दे’ (लेख-संग्रह); ‘लखनऊ का उत्तराखंड’ (समाज-अध्ययन); ‘शेखर जोशी : कुछ जीवन की, कुछ लेखन की’, ‘ये चिराग जल रहे हैं’ (संस्मरण); ‘छोटे जीवन की बड़ी कहानी’ (सम्पादन)।

उन्हें ‘राजेश्वर प्रसाद सिंह कथा सम्मान’, ‘गोपाल उपाध्याय साहित्य सम्मान’, ‘गिर्दा स्मृति सम्मान’, ‘आनन्द सागर कथाक्रम सम्मान-2020’ और ‘अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान-2024’ से सम्मानित किया गया है।

सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन

ई-मेल : [email protected] 

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