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Bharat Mein Vigyan Aur Takneeki Pragati-Hard Cover

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पाश्चात्य विद्वान ऐसा बताते रहे हैं कि विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी पाश्चात्य वस्तु है। इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत यह ग्रीस में शुरू हुई और कुछ समय बाद पुन: यूरोप में प्रकट हुई, तब से जो उन्नति हुई वह मानव इतिहास में अद्वितीय है। उनके अनुसार, इस उन्नति से बाक़ी विश्व को लाभ हुआ है। वह आगे बताते हैं कि इस समय यूरोप इस ज्ञान को उन देशों में प्रसारित कर रहा है जिनमें इसे जज़्ब करने की क्षमता है। लेकिन आज हमें जो ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, वह इसके विरुद्ध हैं। इतिहास पर एक सरसरी नज़र दौड़ाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी भारतीय संस्कृति के अंश और उसकी सभ्यता का आधार रहे हैं। अपने इतिहास के हर काल में भारतीयों ने विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उल्लेखनीय योगदान दिया। यह ज्ञान पूर्णत: उपलब्ध था और विश्व के भिन्न भागों में और भिन्न संस्कृतियों में फैला। पूर्व में चीन और इंडोनेशिया, पश्चिमी एशिया, केन्द्रीय एशिया और यूरोप ने भारत से जो कुछ ग्रहण किया, उससे पर्याप्त लाभ उठाया। अन्धकार युग में और 12वीं से 18वीं सदी के सात सौ वर्षों की अवधि में भारत में संस्कृत, अरबी और फ़ारसी में विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी पर दस हज़ार ग्रन्थ लिखे गए। यह फ़ेहरिस्त अन्तिम नहीं है। इसके अलावा इन भाषाओं और अन्य भारतीय भाषाओं में अनेक ग्रन्थ थे। इसलिए जो अब किया जा रहा है, वह उसी परम्परा का पुनरुद्धार है जिसे औपनिवेशिक राज में भंग कर दिया गया था।

आज़ादी के विगत वर्षों ने देश को, जो कभी सिर्फ़ यूरोप को कच्चा माल देता था, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति के रूप में रुपान्तरित किया है। भारत आणविक, अन्तरिक्ष, सागरीय और अटलांटिक क्लब में प्रवेश कर चुका है।

विज्ञान के विख्यात अध्येता ए. रहमान की यह पुस्तक स्वतंत्र भारत में विज्ञान और तकनीकी प्रगति के विभिन्न आयामों को रेखांकित करती हुई हमें इस प्रगति का एक सम्पूर्ण तथ्यात्मक विवरण उपलब्ध कराती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Raghuraj Gupta
Editor Not Selected
Isbn 10 812670635x
Publication Year 2003
Edition Year 2026, Ed. 2nd
Pages 192p
Price ₹895.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Author: A. Rahman

. रहमान

जन्म : 1923;

शिक्षा : जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली; अलीगढ़ यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ व इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस, बंगलौर में। विज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए भारत सरकार की ओर से ‘पद्मश्री’ से सम्मानित श्री रहमान विज्ञान से सम्बद्ध अनेक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। कुछ प्रमुख संस्थाएँ हैं : इंटरनेशनल अकेडमी ऑफ़ हिस्ट्री एंड साइंस में सदस्य; ऑपरेशन रिसर्च सोसायटी ऑफ़ इंडिया में फ़ेलो, प्लानिंग काउंसिल ऑफ़ साइंटिफ़िक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के अध्यक्ष तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज के संस्थापक-निदेशक।

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