Bharat Ek Bazar Hai

Satire
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विष्णु नागर का व्यंग्य अपने समय के अन्य व्यंग्यकारों से इस मायने में अलग है कि वे अपनी बात की नोक को तीखा करने के लिए उस लाघव का सहारा नहीं लेते जिसके कारण व्यंग्य-रचना कई बार अनेकानेक पाठकों के लिए अबूझ और कभी-कभी आहतकारी भी हो जाती है। वे अपने सामने उपस्थित स्थिति-परिस्थिति की व्यंग्यात्मकता और विडम्बना को हर सम्भव कोण से खोलकर पाठक के सामने रख देते हैं; और कोशिश करते हैं कि प्रदत्त समस्या में मौजूद व्यंग्य के हर स्तर को रेखांकित करें।

‘भारत एक बाज़ार है’ शीर्षक प्रस्तुत संग्रह भी उनके व्यंग्य-शिल्प की इस मूल प्रतिज्ञा को आगे लेकर जाता है कि व्यंग्य का उद्देश्य कोरी गुदगुदी या हास्य उत्पन्न करना नहीं, बल्कि पाठक के मन में अपनी और अपने समाज की जीवन-स्थितियों के विरेचनकारी साक्षात्कार के द्वारा मोहभंग और परिवर्तन की भूमिका बनाना है।

इस पुस्तक में संकलित व्यंग्य रचनाओं का दायरा राजनीति, समाज, धर्म, प्रशासन, मध्यवर्गीय आकांक्षाओं की विकृतियों से लेकर बाज़ारीकरण, देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार तक फैला हुआ है। ये व्यंग्य-निबन्ध हमें अपने समकालीन सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था के उन सभी करुण पक्षों से रू-ब-रू कराते हैं, जिनका अपरिवर्तनीयता से जूझने का माध्यम अभी हमारे पास सिर्फ़ व्यंग्य है।

उम्मीद है, विष्णु नागर की यह पुस्तक पाठकों की अपनी जद्दोजहद में सहायता की भूमिका निबाहेगी।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Edition Year 2011
Pages 168p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
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Editorial Review

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Vishnu Nagar

Author: Vishnu Nagar

विष्णु नागर
जन्म : 14 जून, 1950
शिक्षा : बचपन और छात्र-जीवन शाजापुर (मध्य प्रदेश) में बीता। 1971 से दिल्ली में स्वतंत्र पत्रकारिता शुरू की। 'नवभारत टाइम्स’ में पहले मुम्बई और बाद में दिल्ली में विशेष संवाददाता सहित विभिन्न पदों पर 1974 से 1997 के आरम्भ तक रहे। इस बीच 1982 से 1984 तक जर्मन रेडियो 'डोयचे वैले’ में सम्पादक रहे। 1997 से 2002 तक 'हिन्दुस्तान’ (दैनिक) के विशेष संवाददाता। 2003 से 2008 तक हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप की पत्रिका 'कादम्बिनी’ के कार्यकारी सम्पादक रहे। कुछ समय तक दैनिक 'नई दुनिया’ से सम्बद्ध रहे।
प्रकाशित कृतियाँ : कविता-संग्रह–'मैं फिर कहता हूँ चिड़िया’, 'तालाब में डूबी छह लड़कियाँ’, 'संसार बदल जाएगा’, 'बच्चे, पिता और माँ’, 'कुछ चीज़ें कभी खोई नहीं’, 'हँसने की तरह रोना’; कहानी-संग्रह–'आज का दिन’, 'आदमी की मुश्किल’, 'कुछ दूर’, 'ईश्वर की कहानियाँ’, 'आख्यान’, 'रात-दिन’ तथा 'बच्चा और गेंद’; उपन्यास–'आदमी स्वर्ग में’; निबन्ध–'हमें देखती आँखें’, 'आज और अभी’, 'यथार्थ की माया’, 'आदमी और उसका समाज’ तथा 'अपने समय के सवाल’; व्यंग्य-संग्रह–'जीव-जन्तु पुराण’, 'घोड़ा और घास’, 'राष्ट्रीय नाक’, 'नई जनता आ चुकी है’ तथा 'देश-सेवा का धंधा’, 'भारत एक बाज़ार है’।
'सहमत’ के लिए धर्मनिरपेक्ष रचनाओं के तीन संकलनों तथा 'रघुवीर सहाय’ पुस्तक का सम्पादन असद ज़ैदी के साथ। सुदीप बैनर्जी की प्रतिनिधि कविताओं के संकलन का सम्पादन लीलाधर मंडलोई के साथ। 'बोलता लिहाफ’ (श्रेष्ठ कथाकारों की कहानियों का संकलन) का सम्पादन मृणाल पाण्डे के साथ। इसके अलावा नवसाक्षरों के लिए कई पुस्तकें लिखीं तथा सम्पादित कीं।
सम्मान : 'कथा’ संस्था का 'अखिल भारतीय कथा पुरस्कार’, हिन्दी अकादमी, दिल्ली का 'साहित्य सम्मान’, कविता के लिए 'शमशेर सम्मान’,
‘डॉ. शिवकुमार मिश्र स्‍मृति सम्‍मान’, मध्य प्रदेश सरकार का 'शिखर सम्मान’ तथा व्यंग्य के लिए 'व्यंग्यश्री सम्मान’, ‘जनकवि मुकुट बिहारी सरोज सम्‍मान’ आदि।

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