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Baat Un Dino Ki Hai-Hard Cover

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9788119133994
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बात उन दिनों की है पुस्तक संस्मरण भी है और आत्मीय ग्रामबोध का आख्यान भी। पुस्तक में ग्रामीण जीवन की सहज, सरल और मुक्त प्रकृति का चित्र खींचा गया है। इन चित्रों की रचना में लेखक स्वयं भी सम्मिलित है इसलिए इसकी शैली और शिल्प में एक विशेष प्रकार की चुम्बकीयता है।

पुस्तक में यद्यपि व्यक्तिव्यंजक निबंध अंकित हैं, पर है यह गंवई सहजता का शब्दचित्र। ये शब्दचित्र छोटे-छोटे प्रसंगों में बांध कर रचे गए हैं। गाँव के विद्यालय, मेले, नदी-नाले ये सब पुस्तक में रोचक प्रसंग बनकर उभरे हैं। ग्रामीण खानपान का रसीला चित्र भी मिलेगा - नेनुआ की पनीली तरकारी के साथ गरम-गरम भात, होरहा, गट्टा, भुनी मटर हमें लोक जीवन का असली स्वाद चखाते हैं। कुछ व्यक्ति-चित्र और कुछ अतीत की वस्तुएँ जैसे बाइस्कोप, आनंद की सृष्टि करनेवाले हैं।

आनंद का भाव पूरी पुस्तक में व्याप्त है। वास्तव में यही ग्राम जीवन का स्थायी भाव है। गाँव का यह आनंदी स्वभाव इस पुस्तक की आत्मा है। तीस प्रसंगों में प्रस्तुत यह पुस्तक अत्यंत पठनीय है। लेखक के आत्मीय भाव ने प्रसंगों की संवेदना को दोबाला कर दिया है। इस आत्मीयता के कारण पूरी पुस्तक की शैली कहीं भी शिथिल नहीं होती, बल्कि पाठक को अपने साथ बहाये लिए जाती है। यह प्रवाहमयता इस पुस्तक के गद्य की विशिष्टता है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 176p
Price ₹600.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Sriprakash Mani Tripathai

Author: Sriprakash Mani Tripathai

प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी

प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का जन्म 01-07-1958 में ऊधोपुर (देवरिया) उत्तर प्रदेश में हुआ। आप साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परम्परा में विशेष रुचि रखते हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ तथा अनेक अकादमिक एवं साहित्यिक पुरस्कारों से अलंकृत प्रो. त्रिपाठी का चिंतनशील आचार्यों की परम्परा में प्रमुख स्थान है। सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक घटनाओं के कुशल चितेरे ख्यातिलब्ध लेखक एवं साहित्यकार हैं। भारतीय ज्ञान परम्परा तथा सामयिक विषयों पर अभी तक उनकी 30 पुस्तकें प्रकाशित हैं।

सम्प्रति : कुलपति, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकण्टक (मध्य प्रदेश)।

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