Apna Vajood

Poetry
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Apna Vajood

श्यामपलट पांडेय वर्तमान समय और उससे जन्मे प्रत्यक्ष आवेग के कवि हैं। हमारा सामाजिक परिवेश जीवन-मूल्यों की टूटन और त्रासद स्थितियों के तनाव से भरा हुआ है। एक संवेदनशील कवि के लिए हमारे इस वर्तमान की कोई भी शक्ल अनिवार्यतः एक विडम्बना-बोध से ही जन्म लेती है। इन कविताओं में रोज़मर्रा के जीवन के सन्दर्भ हैं, छोटे-बड़े प्रसंग और परिस्थितियाँ हैं। पांडेय जीवन के विद्रूप से सीधे मुठभेड़ करते हैं। कहीं इन कविताओं में एक विकलता है तो कहीं एक प्रश्नाकुलता। कहीं अपने रचना-कर्म के प्रति ही एक बुनियादी संशय का भाव भी। दरअसल यही हमारे समय के अनुभव के विभिन्न शेड्स हैं। विसंगतियों के चित्रों के साथ इन कविताओं में परिवर्तन की एक बुनियादी कामना भी है।

तिक्त अनुभवों के बीच से उठी ये कविताएँ जीवन के किसी बेशक़ीमती तत्त्व को बचाए रखने की विकलता की कविताएँ हैं। महत्त्वपूर्ण यह भी है कि श्यामपलट पांडेय का कवि-मन अपने जातीय अनुभव-बोध की ज़मीन से गहरा जुड़ा हुआ है। विडम्बनाओं के चक्रव्यूह में फँसे हुए रचनाकार की अपनी जड़ों की ओर लौटने की एक बेचैनी इन कविताओं में दिखाई पड़ती है। इसीलिए आस-पास की दुनिया और घर-परिवार की अन्तरंगता के अनेक चित्र इन कविताओं में मौजूद हैं। कहना न होगा कि कुटुम्ब से जुड़ी संवेदना हमारे समय में अमानवीय ताक़तों के बरक्स एक नया अर्थ ग्रहण करती है। उसके नए सामाजिक-मनोवैज्ञानिक आशय बनते हैं। अपने पास-पड़ोस से यह लगाव इस दौर में या शायद किसी भी दौर में कविता को हमेशा आत्मीय और प्रामाणिक बनाता रहा है। पांडेय की ये कविताएँ वादों और मुहावरों के शोरगुल से दूर अपनी नैसर्गिक ऊर्जा, जीवन-राग और सहज अनुभूति के बल पर ‘अपने वजूद’ का एहसास कराती हैं।

—विजय कुमार

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 2003
Pages 83p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1
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Editorial Review

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Author: Shyampalat Pandey

श्यामपलट पांडेय

जन्म : 15 फरवरी, 1949; जामो, सुल्तानपुर (उ.प्र.)।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य, 1969), लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रथम श्रेणी तथा प्रथम स्थान के साथ एल.एल.बी. 2007, गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद।

विशेष रुचि : गढ़वाल, कुमाऊँ (उत्तरांचल), हिमाचल प्रदेश तथा गुजरात के अपरिचित आदिवासी अंचलों में दूर-दूर तक कई बार भ्रमण।

कार्य : 1969 से 1972 तक शिक्षण-कार्य; 1974 में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर; 1974 से ही भारतीय राजस्व सेवा में अब सेवानिवृत्‍त।

प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ : ‘अँधेरे से अँधेरा काटता हूँ’, ‘धूप आज फिर उतरी है’; ‘अपना वजूद’ ‘मेरे समय के साथ’, ‘The Jungle of Screams and Other Poems’ आदि (काव्य-संग्रह)।

विभिन्‍न भाषाओं में कविताएँ अनूदित।

सम्मान : ‘अपना वजूद’ के लिए ‘घनश्यामदास सर्राफ साहित्य पुरस्कार’ योजना के अन्तर्गत हिन्दी भाषा के प्रतिष्ठित सम्मान ‘सर्वोत्तम साहित्य पुरस्कार—2003’ से सम्मानित।

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