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Amir Khusro : Vyaktittva, Chintan Aur Sampoorna Hindavi Kalam-Paper Back

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9789348157041
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अमीर ख़ुसरो जिन्हें दो बड़ी सभ्यताओं के सम्मिलन का प्रतिनिधि व्यक्तित्व कहा जाता है; और चौदहवीं सदी में रचा गया जिनका कलाम आज भी अपनी जगह कायम है, वे एक बड़े कवि तो थे ही, राजनीतिज्ञ, संगीतकार और भाषाविद भी थे।

‘अमीर ख़ुसरो : व्‍यक्तित्‍व, चिन्‍तन और सम्‍पूर्ण हिन्‍दवी कलाम’ पुस्तक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की लगभग सम्पूर्ण प्रस्तुति है। पुस्तक दो खंडों में विभक्त है। पहले खंड में खुसरो की भाषा और उनकी हिन्दवी रचनाओं पर शोधपरक विवेचना के साथ उनकी रचना ‘ख़ालिक़ बारी’ और उससे जुड़े विवादों पर विचार, तसव्वुफ़ की उनकी धार‌णा और उनके व्यक्तित्व में तसव्वुफ़ की भूमिका पर केन्द्रित शोध के अलावा जिन सुल्तानों और सूबेदारों के आश्रय में वे रहे उनकी जानकारी भी विस्तारपूर्वक दी गई है।

अमीर ख़ुसरों ने अपने जीवनकाल में बारह युद्ध-अभियानों में भाग लिया था, इस खंड में उनकी चर्चा भी ऐतिहासिक संदर्भों के साथ की गई है। एक संगीत-सृजक के रूप में उन्होंने जहाँ नए रागों की रचना की, वहीं नए संगीत वाद्यों का भी आविष्कार किया। एक विस्तृत आलेख इस विषय पर भी इसी खंड में शामिल है।

किताब के दूसरे हिस्से में उनके अब तक उपलब्ध हिन्दवी काव्य को प्रस्तुत किया गया है। उनकी पहेलियों, कहमुकरियों, दोहों, कविताओं, गीतों, कव्वालियों, ग़ज़लों और ‘ख़ालिक़ बारी’ को यहाँ आप एक साथ देख सकते हैं।

कहने की जरूरत नहीं कि अमीर खुसरो के साथ यह पुस्तक उनके समय, तत्कालीन इतिहास और उस दौर की सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डालती है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 368p
Price ₹450.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Zakir Hussain Zakir

Author: Zakir Hussain Zakir

ज़ाकिर हुसैन ज़ाकिर

ज़ाकिर हुसैन ज़ाकिर का जन्म 10 जनवरी, 1966 को उत्तर प्रदेश, देवरिया में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा देवरिया में ही हुई। शिब्ली नेशनल पीजी कालेज, आजमगढ़ से स्नातक और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से स्नातकोत्तर किया। 1992 में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त करने के बाद अध्यापन कार्य प्रारम्भ। लम्बे समय तक रोज़नामा ‘राष्ट्रीय सहारा’ गोरखपुर संस्करण में अंशकालिक संवाददाता के रूप में भी कार्य किया। गोरखपुर के सामाजिक और शैक्षिक इतिहास पर व्यापक शोध कार्य कर रहे हैं।

उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं—‘हिन्दुस्तानी मीडिया और उर्दू’, ‘खंदा हाए गुल’, ‘उर्दू सहाफ़त का आग़ाज़ और इर्तिका’ और ‘अमीर ख़ुसरो तसव्वुफ़ शख़्सियत और शाइरी’। अमीर ख़ुसरो के जीवन और समकालीन इतिहास पर लम्बी कहानी ‘तुरमती ख़ातून’ लेखन प्रकिया में है। निबन्ध, कहानियाँ और अलोचनात्मक विश्लेषण उर्दू के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।

ई-मेल : [email protected]

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