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Akhir Bole Kyon Nahi Aap-Paper Back

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‘आखिर बोले क्यों नहीं आप’ संग्रह न केवल अपने समय की गवाही देता है, बल्कि उसकी चुनौतियों की शिनाख्त करते हुए, उनसे दो-दो हाथ करने का उपक्रम भी करता है। इन कविताओं में मेहनतकशों के जीवन की तमाम झाँकियाँ है और उनकी मुक्ति में ही मानवता की मुक्ति की अपरिहार्यता का विश्वास भी। कवि का दृढ़ विश्वास है कि अपने दुःख में डूबने की जगह जन-जन की पीड़ा को अपना बनाकर, उसे दूर करने के संघर्ष में लगकर ही दुनिया सुन्दर बनती है।

कवि का मुख्य स्वर इंसानियत के पैमाने से भारतीय लोकतंत्र, राष्ट्र-राज्य, धर्मसत्ता और पूँजीवादी व्यवस्था की मार्मिक आलोचना और नागरिक कर्तव्य का राजनैतिक स्वर है, लेकिन इसके बीच ही आत्मसाक्षात्कार की कविताएँ भी हैं, प्रकृति, प्रेम और परिवार भी बराबर विद्यमान है, साथ ही कवि का जिया हुआ उसका प्यारा शहर इलाहाबाद भी जिसे उसने देश के साथ बदलते देखा और अनुभव किया है।

हमारे समय और सभ्यता के परस्पर-संघर्षी स्वरों, चित्रों से संवलित, देश-काल के शर से बिंधी इस संग्रह की तमाम मार्मिक कविताएँ नागरिकों, युवाओं, मित्रों, संस्कृतिकर्मियों, परिजन, सहयोद्धाओं को सम्बोधित हैं—जीवन के प्रति अदम्य निष्ठा और प्रेम, मानवता की अन्तिम विजय के प्रति आस्थावान, जो निश्चय ही पाठकों के जीवन-विवेक में बहुत कुछ जोड़ती हुई, उनके मानस की गहराइयों में गूँजती रहने में समर्थ हैं।

—प्रणय कृष्ण

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 176p
Price ₹300.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 13 X 1
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Sudhanshu Kumar Malviya

Author: Sudhanshu Kumar Malviya

सुधांशु कुमार मालवीय

जन्म : 30 अगस्त 1948

शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी.         

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालय इलाहाबाद डिग्री कालेज में हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त।

साहित्य-सेवा : पहल, वागर्थ, बया, वर्तमान साहित्य, परिकथा, उद्भावना, दोआबा आदि अधिकांश प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं और लेखों का प्रकाशन तथा आकाशवाणी, इलाहाबाद से प्रसारण। साहित्य और सांस्कृतिक कर्म के अलावा जन-आन्दोलनों से गहरा जुड़ाव और निरंतर भागीदारी। इलाहाबाद शहर में लम्बे अरसे तक ‘सम्मुख’ और ‘आरोही’ जैसी चर्चित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं का संचालन। शहीदों-क्रांतिकारियों के लिए समर्पित संस्था शान-ए-वतन यादगार समिति का संचालन। वर्तमान में  ‘आखर’ साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच से संबद्ध।

सम्पर्क : 38/28, अमरनाथ झा मार्ग, प्रयागराज-211002

ई-मेल : [email protected]

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