Vivah Sanskar : Swaroop Evam Vikas

Sociology
Author: Tapi Dharma Rao
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Vivah Sanskar : Swaroop Evam Vikas
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तेलगू के ख्यात लेखक तापी धर्माराव के लेखन का आधार इतिहास व किंवदन्तियों का वैज्ञानिक अन्वेषण है। प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर उन्होंने सामाजिक यथार्थ की पुस्तकें लिखी हैं। स्थापित रूढ़ मान्यताओं के पैरवीकारों को थोड़ी आपत्ति अवश्य हो सकती है, लेकिन इन मुद्दों पर विचार करने के लेखकीय आग्रह को वे टाल नहीं सकते।

यह पुस्तक विवाह संस्कार के स्वरूप और विकास का बख़ूबी मनोविश्लेषण करती है। नर तथा नारी के सम्बन्धों के समाज पर पड़े प्रभाव के कारण बहुतेरी कुप्रथाएँ भी प्रचलित हो जाती हैं और उचित जानकारी के अभाव में यह यथावत् रहती हैं। यदि समाज के सम्मुख इन कुप्रथाओं को उजागर किया जाए तो इसके नैतिक स्वरूप में परिवर्तन सम्भव है। समस्याओं की यथावत् पहचान कर उन्हें स्पष्ट कर दिया जाए तो स्वयमेव उनके नैतिक स्वरूप में अन्तर आ जाता है। ऐसा ही सार्थक प्रयास तापी धर्माराव ने अपनी इस समाज–मनोविज्ञान की पुस्तक में किया है।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2001
Edition Year 2001, Ed. 1st
Pages 119p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 0.5
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Editorial Review

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Tapi Dharma Rao

Author: Tapi Dharma Rao

तापी धर्माराव

जन्म : 19 सितम्बर, 1887

कवि, आलोचक, नाटककार, समाजसेवी, प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन और वेगुचुक्क ग्रन्थालय के संस्थापक।

प्रमुख कृतियाँ : ‘पेल्लिदानि पुट्टु पूर्वोत्तरालु, ‘देवालयाल मीद बूतु बोम्मलु ऐंदुक’, ‘इनपकच्चडालु’, ‘रालू-रप्पलु’, ‘मस्वु तेरलु’, ‘कोत्त पाली’, ‘पात पाली’, ‘साहित्य मोरमरालु’, ‘आल इंडिया अडुक्कु तिनेवाल्ल महासभा’ आदि।

निधन : 8 मई, 1973

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