Soorsagar Satik : Vols. 1-2

Poetry
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Soorsagar Satik : Vols. 1-2

सूरसागर का प्रस्तुत संस्करण दो भागों में प्रकाशित हो रहा है। प्रत्येक भाग में 1000 से कुछ अधिक पद होंगे। पदों की व्याख्या करना इसका उद्देश्य नहीं है। यह सम्भव है कि किन्हीं अंशों के एक से अधिक अर्थ निकलते हों, किन्तु स्थानाभाव के कारण अनेक अर्थ दे पाना सम्भव नहीं था। पदों में जो कठिन शब्द आए हैं, उन्हें अंग्रेज़ी अंक देकर संकेतित कर दिया गया है। इससे पाठकों को स्वतंत्र रूप से अर्थ चिन्‍तन की सुविधा रहेगी।

भूमिका में ‘सूरसागर’ के संकलनों और संस्करणों पर विचार करने के पश्चात् ‘सूरसागर’ के दर्शन, भक्तिपक्ष, भावप्रसार, अभिव्यंजना-कौशल, पद-शैली, भाषा आदि विषयों का विवेचन किया गया है जिससे ‘सूरसागर’ की आत्मा को समझने में सहायता मिलेगी। इस प्रकार ‘सूरसागर’ के प्रस्तुत संस्करण को यथासम्भव पूर्ण और उपयोगी बनाने की चेष्टा की गई है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2021
Edition Year 2021, Ed. 1st
Pages 1027p
Translator Rajendra Kumar
Editor Rajendra Kumar
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 24.5 X 16 X 6
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Editorial Review

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Author: Hardev Bahari

हरदेव बाहरी

जन्म : 1 जनवरी, 1907; पाकिस्तान।

शिक्षा : पंजाब विश्वविद्यालय।

प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक, आलोचक। हिन्‍दी, पंजाबी और भारतीय आर्य भाषाओं के जाने-माने

विद्वान्। विभिन्न द्विभाषी और बहुभाषीय शब्दकोशों के सम्‍पादक।

भाषाविज्ञान के अतिरिक्त साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में भी महत्‍त्‍वपूर्ण योगदान।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्‍दी विभाग में प्रोफ़ेसर रहे।

प्रमुख कृतियाँ : ‘प्राकृत और उसका साहित्य’, ‘हिन्‍दी साहित्य की रूपरेखा’, ‘प्रसाद साहित्य

कोश’, ‘प्रसाद काव्य विवेचन’, ‘शब्द सिद्धि’, ‘भोजपुरी शब्द सम्पदा’, ‘अवधी शब्द सम्पदा’,

‘शिक्षार्थी हिन्‍दी-अंग्रेज़ी’, ‘हिन्‍दी सेमेंटिक’, ‘लोकभारती राजभाषा शब्दकोश’, ‘प्रशासनिक कोश’ आदि।

निधन : 31 मार्च, 2000

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