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Madhyakalin Bharat mein Prodhyogiki

Author: Irfan Habib
Translator: Awadhesh Kumar Singh
Edition: 2025, Ed 4th
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹590.75 Regular Price ₹695.00
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Madhyakalin Bharat mein Prodhyogiki

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‘भारत का लोक इतिहास’ श्रृंखला की यह कड़ी भारतीय इतिहास के उस पहलू पर दृष्टिपात करती है जिस पर अभी तक बहुत कम काम हुआ है। इसमें आमजन के साधारणतम औज़ारों से लेकर खगोल-वैज्ञानिकों के उपकरणों और युद्ध में काम आनेवाले हथियारों तक के विकास को रेखांकित किया गया है। अध्ययन का मुख्य तत्त्व यह है कि यह पूर्णतया ऐतिहासिक है, तकनीक के विकास-क्रम की खोज न सिर्फ़ प्रमाणों के साथ की गई है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक परिणामों को भी विस्तार से समझा गया है।

श्रृंखला की अन्य पुस्तकों की तरह इसमें भी मूल दस्तावेज़ों के उद्धरणों और आधुनिक-पूर्व तकनीक के विषय में विशिष्ट सूचनाएँ दी गई हैं। तकनीकी शब्दावली, तकनीक के ऐतिहासिक स्रोतों और भारत से बाहर विकसित होनेवाली मध्यकालीन तकनीक पर विशेष टिप्पणियाँ भी दी गई हैं।

छात्रों और सामान्य पाठकों को ध्यान में रखते हुए कोशिश की गई है कि प्रामाणिकता को हानि पहुँचाए बिना पुस्तक जितनी सरल हो सकती है, उतनी हो सके। उम्मीद है कि सिर्फ़ इतिहासकारों को ही नहीं, हर उस पाठक को यह प्रस्तुति मूल्यवान लगेगी जो यह जानना चाहते हैं कि प्राचीन युग में जनसाधारण, आम स्त्री और पुरुषों ने अपने हाथों और औज़ारों से क्या कुछ किया।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Awadhesh Kumar Singh
Editor Not Selected
Publication Year 2016
Edition Year 2025, Ed 4th
Pages 158p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Irfan Habib

Author: Irfan Habib

इरफ़ान हबीब

यशस्वी इतिहासकार। उन्नत इतिहास अध्ययन केन्द्र, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं।

प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित सैकड़ों लेखों के अलावा आप ‘एग्रेरियन सिस्टम ऑफ़ मुग़ल इंडिया’ (1963), संशोधित संस्करण : 1999; ‘एन एटलस ऑफ़ द मुग़ल इंपायर’ (1982); ‘एस्सेज़ इन इंडियन हिस्ट्री’; ‘टुवर्ड्स ए मार्कि्सस्ट परसेप्शन’ (1995) तथा ‘मेडिवल इंडिया : द स्टडी ऑफ़ ए सिविलाइजेशन’ (2001) के लेखक हैं। आप ‘कैम्ब्रिज इकॉनोमिक हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया’—खंड-I (1982); ‘यूनेस्को की हिस्ट्री ऑफ़ ह्यूमेनिटी’—खंड-IV व V तथा ‘हिस्ट्री ऑफ़ सेंट्रल एशिया’—खंड-V के सह-सम्पादक भी हैं।

‘भारत का लोक इतिहास’ (People’s History of India) शृंखला के प्रधान सम्पादक, जिसके तहत आपने पाँच पुस्तकों का लेखन व दो पुस्तकों में सहलेखन किया है।

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