Jungle Tantram

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Jungle Tantram

सिंह बनाम राजनेता। मोर बनाम प्रशासक। नाग बनाम पूँजीपति और चूहा बनाम आम आदमी—‘जंगल तंत्रम’ के ये ख़ास घटक हैं। इन्हीं चार जन्तुओं के माध्यम से लेखक ने आज की राजनीति के तहत चलनेवाली लोकतांत्रिक शासन-प्रणाली के जनविरोधी चरित्र को उजागर किया है।

सिंह, मोर और नाग किस तरह अपने-अपने निहित स्वार्थों के लिए पारस्परिक गठजोड़ किए हुए हैं, फ़ैंटेसीनुमा इस उपन्यास से यह बख़ूबी समझ में आ जाता है। चूहा इसे समझता भी है कि इसकी जोड़-तोड़ का असली शिकार तो मैं ही हूँ पर वह इससे उबर नहीं पाता। छोटे-छोटे प्रलोभनों, सुख-सुविधाओं की आस उसे बराबर कमज़ोर बनाए हुए है। संघर्ष के लिए वह खड़ा तो होता है, पर उसी की वर्गीय और परम्परागत दुर्बलताएँ उसकी पीठ का बोझ बनी हुई हैं।

वास्तव में सुपरिचित कथाकार श्रवण कुमार गोस्वामी का यह बहुचर्चित उपन्यास अपनी सार्थक प्रतीकात्मकता और धारदार भाषा-शैली के आद्योपान्त निर्वाह के कारण एक अनूठा प्रभाव छोड़ता है।

More Information
Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2017
Edition Year 2017, Ed. 1st
Pages 102p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 0.5

Author: Shrawan Kumar Goswami

श्रवण कुमार गोस्वामी

जन्म : 19 जनवरी, 1938; राँची (झारखंड)।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पीएच.डी.।

प्रमुख कृतियाँ : उपन्यास—‘जंगल तंत्रम्’, ‘सेतु’, ‘भारत बनाम इंडिया’, ‘दर्पण झूठ ना बोले’, ‘राहु केतु’, ‘मेरे मरने के बाद’, ‘चक्रव्यूह’, ‘एक टुकड़ा सच’, ‘आदमखोर’, ‘केन्द्र और परिधि’; नाटक—‘कल दिल्ली की बारी है’, ’समय’; एकांकी-संग्रह—‘सोमा’; कहानी-संग्रह—‘जिस दीये में तेल नहीं’; जेल-जीवन—‘लौहकपाट के पीछे’; शोध—‘नागपुरी भाषा’, ‘नागपुरी शिष्ट साहित्य’, ‘नागपुरी और उसके बृहत्-त्रय’; प्रमुख सम्पादित-ग्रन्थ—‘डॉ. बुल्के स्मृति-ग्रन्‍थ’, ‘रामचरितमानस’ (मुंडारी अनुवाद)।

सम्‍मान : ‘राधाकृष्‍ण पुरस्‍कार’ से सम्‍मानित।

गोस्‍वामी जी राँची विश्वविद्यालय (राँची) के हिन्दी विभाग में आचार्य रहे।

निधन : 11 अप्रैल, 2020

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