Dehati Duniya

Author: Shivpujan Sahai
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Dehati Duniya
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फणीश्वरनाथ रेणु ने अपने उपन्यास ‘मैला आँचल’ (1953) की भूमिका में पहली बार आंचलिकता की धारणा का विशेष उल्लेख किया था, किन्तु कथा-साहित्य में आंचलिकता की स्थापना पहली बार ‘देहाती दुनिया’ (1926) के लेखन-प्रकाशन के साथ हुई, यह सर्वमान्य है।

हालाँकि यह उपन्यास आज से लगभग नौ दशक पूर्व लिखा गया था किन्तु इसमें वर्णित गाँव की यथातथ्य संस्कृति एवं सभ्यता की झाँकी आज भी उतनी ही सटीक है, जितनी पहले थी। ठेठ देहाती शैली इस उपन्यास की विशिष्टता है, जो गाँव की फटेहाली और विकृतियों यथा—जादू-टोना, अन्धविश्वास आदि का चित्रण करती हैं। ‘देहाती दुनिया’ गाँव के भोले-भाले लोगों पर पुलिसिया ज़ुल्मो-सितम की भी कहानी कहती है।

इस उपन्यास में सबसे रोचक और मनभावन प्रसंग है बचपन की चुहलबाज़ी का। इसमें एक ओर अपने इकलौते लाडले के लिए माँ के निश्छल प्रेम की झाँकी है तो दूसरी ओर अपने बेटे के भविष्य को लेकर पिता की चिन्ता भी व्यक्त हुई है।

More Information
Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 1994
Edition Year 2023, Ed 8th
Pages 182p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
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Shivpujan Sahai

Author: Shivpujan Sahai

आचार्य शिवपूजन सहाय

जन्म : 9 अगस्त, 1893; उनवाँस नामक गाँव (शाहाबाद) बिहार।

प्रारम्भिक शिक्षा देहाती पाठशाला में। इंट्रेंस के पहले तक उर्दू-फ़ारसी के विद्यार्थी थे। इंट्रेंस के समय उर्दू-फ़ारसी छोड़कर हिन्दी का अध्ययन शुरू किया। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कॉलेज की शिक्षा से वंचित। 1913 में ही, बनारस की अदालती-कचहरी में हिन्दी नक़लनवीस की नौकरी की। 1914 में विभिन्न संस्थाओं में हिन्दी शिक्षक रहे। साथ ही स्थानीय सेवा-समिति के संयुक्त मंत्री तथा नागरीप्रचारिणी सभा के सहकारी मंत्री भी रहे। 1923 में ‘मर्वाला' मंडल की स्थापना हुई और वे उसमें चले आए। 1939 से 1949 तक राजेंद्र कॉलेज, छपरा में प्राध्यापक रहे। 1960 में 'पद्मभूषण' की उपाधि से अलंकृत। 1962 में भागलपुर विश्वविद्यालय से डी.लिट्. की मानद उपाधि।

प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : ‘देहाती दुनिया’ (उपन्यास); ‘विभूति’ (कहानी-संग्रह); ‘वे दिन वे लोग’, ‘बिम्ब : प्रतिबिम्ब’ (संस्मरण); ‘शिवपूजन रचनावली’ (4 खंड)।

सम्पादन : ‘मारवाड़ी सुधार’, ‘आदर्श’, ‘मौजी’, ‘समन्वय’, ‘गोलमाल’, ‘माधुरी’, ‘बालक’, ‘गंगा’, ‘हिमालय’, ‘राजेंद्र अभिनन्दन ग्रन्थ’, ‘साहित्य’।

निधन : 21 जनवरी, 1963

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