Deh Ki Bhasha

Poetry
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Deh Ki Bhasha
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‘देह की भाषा’ सुरेश कुमार वशिष्ठ का महत्त्वपूर्ण कविता-संग्रह है। गाँव और माटी से जुड़े सुरेश सामाजिक अन्तःकरण रखनेवाले कवि हैं और इसी दायरे में रिश्तों की तलाश करते हैं। वे अपनी परिस्थिति और अपनी काव्यवस्तु से प्रगीतात्मक रिश्ता बनाकर जीवन के अनुभव की अखंडता और भाव-जगत की सच्चाई को शब्दों में समेट लेते हैं। वे प्रेम के चित्र उकेरते हुए जीवन से एक अपूर्व सांगीतिक लय बनाए रखने में सफल साबित होते हैं।

‘देह की भाषा’ में कवि का विनम्र मानववाद जीवन के राग-रंग और रति के अलावा समय से जुड़े संकट, व्यक्ति की पीड़ा, उसके रुदन-चिन्ता और आघात से रागात्मक लगाव रखने में सफल साबित होता है। रवीन्द्रनाथ टैगोर कहते हैं, ‘संसार की वास्तविकता मनुष्य की भावनात्मक और कल्पनात्मक पृष्ठभूमि में ही तो प्रकट होती है!’ प्रथमद्रष्ट्या सुरेश बेहद बेपरवाह नज़र आते हैं मगर कभी देह की परिधि में बँधकर प्रेम की सत्ता को स्वीकार करते हुए ख़ुद को उससे दूर नहीं जाने की ज़िद करते दीखते हैं और कभी दूर रहकर भी सहज नहीं रह पाते बल्कि उसके मंगल में अपना मंगल ढूँढ़ते हैं। उसके राग में ही जीवन के रंग ढूँढ़ते हैं...जिन रंगों में रिश्तों की ख़ुशबू है।

सुरेश की कविताओं में भाषाई सहजता है, जिनमें उनके स्वभाव का भोलापन है, जिसके बूते उन्होंने प्रेम के हर पक्ष को समझा है...पूर्णता के साथ, पूर्वग्रह से परे। प्रेम को वे इतना सघन मानते हैं कि पूछो मत...जैसे फ़र्श पर पसरे पानी से लकीरें खींची जाएँ....रेट पर कुछ लिखा जाए, थोड़े क्षणों के लिए ही सही। फिर जैसे सब कुछ धुल जाए, बिसर जाए और रह जाएँ मात्र स्मृतियाँ...हज़ारों स्मृतियाँ अतीत के दामन में। शान्त-स्थिर मगर निरन्तरता के साथ।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2014
Edition Year 2014 Ed. 1st
Pages 112p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Editorial Review

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Suresh Kumar Vashishth

Author: Suresh Kumar Vashishth

सुरेश कुमार वशिष्ठ

जन्म : 11 दिसम्बर, 1972; ग्राम—पखौदना, ज़िला—अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)।

शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के सरकारी विद्यालय में। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातक, विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया। भारतीय जन-संचार संस्थान से अंग्रेज़ी पत्रकारिता में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा।

मुख्यत: हिन्दी में लेखन। कविता, निबन्ध, यात्रा-वृत्तान्त और आत्मकथात्मक लेखन। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित।

1998 में उत्तर प्रदेश प्रादेशिक सिविल सेवा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। उसी साल भारतीय प्रशासनिक सेवा में भी चयन। ओडिशा सरकार में कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य। ख़ास तौर से 1999 के महाचक्रवात में बतौर प्रशिक्षु अधिकारी का ख़ास कार्यानुभव।

ओडिशा राज्य के बोलांगीर, कन्धमाल और सम्बलपुर जैसे ज़िलों में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएँ दीं। सुन्दरगढ़, अंगुल और मयूरभंज ज़िलों के ज़िलाधीश के रूप में भी कार्य किया है।

सम्प्रति : ओडिशा स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर कार्यरत।

ई-मेल : sureshvashishth@gmail.com

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