Chehre Aur Chitthiyan

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Chehre Aur Chitthiyan
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जीवन के आरम्भिक काल में ही कुँवर नटवर सिंह का अन्तरंग सम्बन्ध विभिन्न क्षेत्रों की शीर्षस्थ प्रतिभाओं से हो गया था। निश्चय ही इनमें से हरेक ने उनके जीवन को अलग-अलग तरह से प्रभावित किया और इसका जो समग्र प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर पड़ा उसने उन्हें घटिया जीवन-दृष्टि से बचाए रखा।
अपने-अपने क्षेत्र के दुर्लभ गुणोंवाले और विशाल-हृदयी इन व्यक्तित्वों ने समय-समय पर लेखक नटवर सिंह को कृपा-पत्र लिखे। उन पत्रों और उनके व्यक्तित्व के आधार पर एक ऐसी अनूठी पुस्तक लेखक ने तैयार की जिसमें सरलता और त्वरा दोनों हैं।
इसमें इन्दिरा गांधी, राजा जी, ई.एम. फ़ॉर्स्टर, नीरद सी. चौधुरी, लार्ड माउंटबेटन, आर. के. नारायण, विजयलक्ष्मी पंडित, हान सुयिन, ज़िया-उल-हक़ और नरगिस दत्त जैसी हस्तियों के व्यक्तित्व की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का आत्मीय चित्रण किया गया है।
इन शख़्सियतों के गहरे प्रभाव के बावजूद लेखक ने काफी हद तक तटस्थ और वस्तुनिष्ठ होने का प्रयत्न किया है। उन्होंने मात्र शब्दचित्र नहीं, बल्कि रेखाचित्र तैयार किए हैं जो पाठकों के सामने इन व्यक्तित्वों का आत्मीय व ऊर्जावान स्वरूप लाते हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2006
Edition Year 2022, Ed. 2nd
Pages 192p
Translator Durgaprasad Agarwal
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Kunwar Natwar Singh

Author: Kunwar Natwar Singh

कुँवर नटवर सिंह

 

जन्म : 16 मई, 1931; भरतपुर (राजस्थान) में। 

शिक्षा : बी.ए. (ऑनर्स) सेंट स्टीफ़न कॉलेज, नई दिल्ली; कॉरपस क्रिस्टी कॉलेज, कैम्ब्रिज; बीज़िंग यूनिवर्सिटी, बीज़िंग; फेलो—कॉरपस क्रिस्टी कॉलेज, कैम्ब्रिज।

भारतीय विदेश सेवा : 1953 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल। बीज़िंग (चीन) में 1956-58; संयुक्त राष्ट्र संघ (न्यूयॉर्क) में स्थायी भारतीय मिशन के तहत 1961-66; प्रधानमंत्री कार्यालय में 1966-71; पोलैंड में राजदूत 1971-73; लन्दन में उप-उच्चायुक्त 1973-77; जाम्बिया में उच्चायुक्त 1977-80; पाकिस्तान में राजदूत 1980-82। 

राजनीति : विदेश सेवा से मुक्त होकर सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। 1984 में पहली बार सांसद बने। 1984-89 तथा 1998-99 के दौरान लोकसभा के सदस्य रहे। 2002 में राज्यसभा के लिए चुने गए। 

इस्पात राज्यमंत्री 1985, उर्वरक राज्यमंत्री 1985-86, विदेश राज्यमंत्री 1986-89। मई 2004 से दिसम्बर 2005 तक केन्द्रीय विदेश मंत्री। 

प्रमुख कृतियाँ : ई.एम. फ़ॉर्स्टर : ए ट्रिब्यूट (1964); द लैगेसी ऑफ़ नेहरू (1965); टेल्स फ़्रॉम मॉडर्न इंडिया (1966); स्टोरीज फ़्रॉम इंडिया (1971); महाराजा सूरजमल 1707-1763 (1981); कर्टेन राइज़र (1984); प्रोफ़ाइल एंड लेटर्स (1997); द मैग्नीफिकेंट महाराजा भूपिन्दर सिंह ऑफ़ पटियाला : 1891-1938 (1997); हर्ट टू हर्ट (2003)। इनके अतिरिक्त ढेर सारी पुस्तक समीक्षाएँ एवं आलेख राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

सम्मान : ‘पद्मभूषण’ (1984); ‘ई.एम. फ़ॉर्स्टर लिट्रेसी अवार्ड’ (1989); क्यूंग ही यूनिवर्सिटी, सियोल से राजनीतिशास्त्र में डॉक्टर की मानद उपाधि। सिनेगल गणराज्य द्वारा सम्मान।

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