Bhartiya Spin Gendbaji Ki Parampara

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Bhartiya Spin Gendbaji Ki Parampara
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भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी का इतिहास क़रीब सौ साल पुराना है। हमारे देश की तस्वीर ही स्पिन गेंदबाजी की है व हमारी गेंद पट्टियाँ भी स्पिन गेंदबाज़ों को ही रास आती रही हैं। स्पिन कला भारतीय उपमहाद्वीप की विशेषता मानी जाने लगी है। यहाँ की मिट्टी ही नहीं, हवा-पानी में भी स्पिन की महक महसूस होती है।

भारत में सभी तरह की स्पिन गेंदबाज़ी फलती, फूलती व विकसित होती रही है। इसमें बाएँ हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी भी है व दाहिने हाथ की ऑफ़ स्पिन व कलाई मोड़कर की जानेवाली लेग स्पिन और गुगली भी। बाएँ हाथ के स्पिनर्स में पी. बालू, जमशेद जी, वीनू मनकड़, हीरालाल गायकवाड़, सलीम दुर्रानी व नाडकर्णी भी हैं और बिशन सिंह बेदी, दिलीप दोषी, मनिन्दर सिंह व राजू भी। इसी तरह दाहिने हाथ के ऑफ स्पिनर्स में ग़ुलाम अहमद, प्रसन्ना, वेंकटराघवन, शिवलाल यादव व हरभजन सिंह प्रमुख हैं। दाहिने हाथ के लेग स्पिन गुगली गेंदबाज़ों में एस.एम. जोशी, सी.एस. नायडू, एस.जी. शिन्दे, सुभाष गुप्ते, नरेन्द्र हिरवानी व अनिल कुम्बले विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

आज भारत के सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेनेवाले गेंदबाज़ अनिल कुम्बले भी लेग स्पिनर ही तो हैं। रणजी ट्रॉफ़ी और इससे पहले मुम्बई की मुम्बई स्पर्धा—विशेषकर त्रिकोणी, चतुष्कोणी एवं पंचकोणी स्पर्धा—में भी स्पिन गेंदबाजी का ही दबदबा रहा है।

यह पुस्तक भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी की परम्परा पर ही केन्द्रित है। मगर अन्तिम अध्याय में विश्व के सार्वकालिक महान स्पिन गेंदबाज़ों का भी उल्लेख किया गया है। क्रिकेट प्रेमी पाठकों के लिए यह न केवल उपहार है बल्कि जानकारी के साथ-साथ पठनीयता का रचनात्मक आस्वाद भी प्रदान करती है।

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 2018, Ed. 2nd
Pages 208p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
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Editorial Review

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Suryaprakash Chaturvedi

Author: Suryaprakash Chaturvedi

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी

प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी विगत साढ़े तीन दशकों से क्रिकेट पर लिख रहे हैं। इस बीच इनकी क्रिकेट पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रमुख : ‘सी.के. नायडू’; ‘मुश्ताक अली’; ‘आज़ाद भारत में क्रिकेट’, ‘हमारे आज के क्रिकेट सितारे’, ‘नंबर एक कौन : लारा, स्टीव वॉ या तेंदुलकर’, ‘विश्व क्रिकेट और भारत’, ‘भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी की परम्परा’, ‘हमारे कप्तान नायडू से धोनी तक’, ‘बाईस गज़ की दुनिया आदि।

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के खेल-सम्बन्धी कार्यक्रमों में भी शिरकत करते रहे हैं। प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में क्रिकेट पर उनके लेख समय-समय पर प्रकाशित होते रहते हैं।

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