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Balgandharva : Aadhunik Marathi Rangmach Ke Ek Mithak Ki Talash

Translator: Gorakh Thorat
Edition: 2018, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Balgandharva : Aadhunik Marathi Rangmach Ke Ek Mithak Ki Talash

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बालगंधर्व—मराठी संगीत-रंगमंच के दैदीप्यमान नक्षत्र! अपने सम्पूर्ण अस्तित्व में सिर्फ और सिर्फ कलाकार। भूमिकाओं को ओढ़कर नहीं, अपनी आत्मा की गहराइयों से उगाकर जीने वाले अभिनेता, पुरुष होते हुए जिनकी स्त्री-भूमिकाएँ महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए सौन्दर्य-चेतना की प्रेरक बनीं, मंच पर जिनकी वेशभूषा को देखकर स्त्रियों ने अपना पहनावा, अपना साज-शृंगार दुरुस्त किया और युवकों में अपनी पुरुष-देह को स्त्री-रूप में देखने का फैशन ही चल पड़ा। ऐसे बाल-गंधर्व जो सिर्फ कलाकार नहीं, अपने चाहने वालों के लिए देवता थे, जिन्हें साठ वर्ष की आयु में भी लोगों ने उतने ही प्रेम से, उतनी ही श्रद्धा से देखा जितने चाव से युवावस्था में देखा-सुना।

यह उपन्यास उन्हीं नारायण श्रीपाद राजहंस की जीवन-कथा है जिन्हें बहुत छोटी अवस्था में गाते सुनकर लोकमान्य तिलक ने बालगंधर्व की उपाधि से विभूषित किया और बाद में जो इसी नाम से जाने जाते रहे।

उपन्यास में लेखक ने उनके जीवन के तमाम उपलब्ध तथ्यों को उनके कला तथा निजी जीवन के विवरणों के साथ संगुम्फित किया है; गहरे आत्मीय भाव के साथ उन्होंने भारतीय शास्त्रीय रंगमंच के उस व्यक्तित्व के आन्तरिक और बाह्य जीवन को उस दौर के सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के साथ इस तरह चित्रित किया है कि बालगंधर्व अपने सम्पूर्ण व्यक्तित्व में हमें अपने सामने खड़े दिखने लगते हैं। उनके जीवन के स्वर्णकाल को देख हम चकित होते हैं और बाद में जब उनका जीवन नियति की विडम्बनाओं की लहरों पर बहने लगता है, हम अवसाद से भर उठते हैं। उपन्यास में हम पारम्परिक रंगमंच के एक ऐेसे युग से भी साक्षात्कार करते हैं, जो आज हमें अकल्पनीय लगता है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Gorakh Thorat
Editor Not Selected
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 1st
Pages 392p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2.5
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Abhiram Bhadkamkar

Author: Abhiram Bhadkamkar

अभिराम भड़कमकर

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक। नाटक, फिल्म और साहित्य—तीनों क्षेत्रों में लेखक, अभिनेता और निर्देशक के रूप में सक्रिय। ‘ज्याचा त्याचा प्रश्न’ (सवाल अपना-अपना), ‘लड़ी नज़रिया’, ‘देहभान’, ‘याच दिवशी याच वेळी’ (इसी दिन इसी वक़्त) आदि प्रमुख नाटक। अनेक नाटकों की हिन्दी, कन्नड़ तथा गुजराती में प्रस्तुति।

विभिन्न राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय महोत्सवों में प्रदर्शित 'आम्ही असू लाडके’ (हम होंगे लाड़ले) फिल्म का लेखन और निर्देशन।

बहुचर्चित उपन्यास ऍट एनी कॉस्ट’, कथा-संग्रह ‘चुड़ैल’ तथा मराठी फिल्म ‘बालगन्धर्व’ का लेखन।

प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार समेत महाराष्ट्र राज्य वाङ्मय पुरस्कार, नाट्यदर्पण, महाराष्ट्र राज्य साहित्य परिषद पुरस्कार, राज्य फिल्म लेखन पुरस्कार जैसे अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित।

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