Bagdad Se Ek Khat

Poetry
Author: Mahendra Mishra
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Bagdad Se Ek Khat
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अपने समय से संवाद करती ये कविताएँ कवि महेन्द्र मिश्र के लम्बे प्रशासकीय मौन के बाद सामने आ रही हैं। आज से कोई चौबीस वर्ष पहले उनका पहला काव्य-संकलन आया था—‘अनायास वर्षा’। तब से बहुत कुछ घटित हो चुका है दुनिया में और काव्य का परिदृश्य भी वही नहीं है, जो उस समय था। इन कविताओं से गुज़रते हुए मैंने अनुभव किया कि इस संग्रह के रचयिता ने इस बीच के लगभग सारे सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों को अपनी चेतना में जज़्ब करने के बाद वह वस्तु-फ़लक तैयार किया है, जिससे इस कृति को आकार मिलता है। यह बौद्धिक रूप से एक अत्यन्त सजग रचनाकार की रचना है—जिसे अपने से की गई एक लम्बी बहस भी कहा जा सकता है। वस्तुतः इस किताब का नाम ‘बग़दाद से एक ख़त’ वह संकेतक है, जो इन कविताओं के ‘टोन’ का निर्धारण करता है। मुझे अच्छा लगा कि वैचारिक आवेग वाली लम्बी कविताओं के साथ-साथ यहाँ कुछ अपेक्षाकृत छोटी कविताएँ भी हैं—जैसे ‘वह लड़का’ और ‘नदी’ जो अलग ढंग की कविताएँ हैं और पाठक से सीधे संवाद करती हैं।

यह भरा-पूरा संग्रह प्रमाण है कि अपनी प्रशासकीय उलझनों में चाहे इस कवि ने कविता का साथ—अस्थायी रूप से—छोड़ दिया हो, पर कविता ने अपने इस ‘पुराने प्रेमी’ का साथ कभी नहीं छोड़ा।

— केदारनाथ सिंह

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 2009
Pages 115p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Mahendra Mishra

Author: Mahendra Mishra

महेन्द्र मिश्र

सन् 1938, एटा जनपद, उत्तर प्रदेश के एक गाँव में जन्म। पिता संस्कृत साहित्य और आयुर्वेद के आचार्य थे और जीविका से शिक्षक। भाषा और साहित्य में अभिरुचि विरासत में मिली।

महेन्द्र मिश्र अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. हैं। चार वर्ष वह आगरा और जबलपुर विश्वविद्यालयों में अंग्रेज़ी के व्याख्याता रहे। सन् 1962 में भारतीय रेल यातायात सेवा में प्रवेश किया और 1996 में अपर सदस्य (यातायात), रेलवे बोर्ड एवं विशेष सचिव, रेल मंत्रालय के पद से सेवानिवृत्त हुए।

उनके अध्ययन का क्षेत्र विविध है जिसमें हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेज़ी के साथ-साथ उर्दू और बांग्ला का साहित्य भी शामिल है। उनके प्रिय साहित्यकारों और लेखकों की सूची में निकोलाई गोगोल, ग्राहम ग्रीन, नोम चोम्स्की, एडवर्ड सईद, इतिहासकार एरिक हॉब्सबॉम, मानिक बन्द्योपाध्याय, सुभाष मुखोपाध्याय, अली सरदार जाफ़री, जयकान्तन, नागार्जुन और मुक्तिबोध प्रमुख हैं। साहित्य में वह मानवीय प्रतिबद्धता के क़ायल हैं।

उनके दो कविता-संग्रह प्रकाशित हैं—‘ताज की छाया में’ और ‘अनायास वर्षा’। प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक सत्यजित राय के कृतित्व पर उनकी पुस्तक ‘सत्यजित राय : पथेर पांचाली और रचना जगत’ राजकमल प्रकाशन से 2006 में प्रकाशित हुई। राय के सिनेमा पर यह समग्र समीक्षा पुस्तक बांग्ला में अनूदित हुई और 2007 में आनन्द पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित हुई। रेल पर उन्होंने दो पुस्तकें लिखी हैं—‘रेल परिवहन का स्वरूप’ और ‘भारतीय रेल के सुनहरे पन्ने’।

सेवानिवृत्ति के बाद दिल्ली में रहकर वे फ़िलस्तीन के संघर्ष और विशाल बाँधों और परियोजनाओं की मानवीय त्रासदी के अध्ययन में संलग्न हैं।

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