कल्पना कीजिए कि पृथ्वी को छोड़कर मानव जाति किसी और ग्रह पर जा बसे। तकनीक इतनी विकसित हो जाए कि प्रजनन तथा उत्तरजीविता के लिए स्त्री और पुरुष एक-दूसरे पर निर्भर न हों, दोनों के दो अलग, एक-दूसरे से अनजान लोक बस जाएँ। जब जरूरत हो क्लोनिंग से नए प्राणी का सृजन कर लिए जाएँ और जब देह का कोई अंग असमर्थ लगे उसे एकदम नए अंग से और बुढ़ापे को युवावस्था से बदल लिया जाए!

इस उपन्यास में इस कल्पना को हमारी मौजूदा दुनिया के समानान्तर तमाम सम्भव उपादानों के साथ रचा गया है। विज्ञान कथाओं को जो पाठक अविश्वसनीय कल्पनाओं की उड़ान मानते हैं, और दूसरे ग्रहों से आनेवाले मनुष्य-विरोधी प्राणियों, एलियनों की विचित्र शक्लों से ऊब चुके हैं, उनके लिए यह उपन्यास एक ताजा हवा की तरह है। 

उपन्यास की ताकत है कल्पना का सांगोपांग और तर्कसम्मत निरूपण और उसके भीतर पैठकर कहानी को इस तरह कहना कि जब तक आप उसमें रहते हैं, अपनी वर्तमान दुनिया से बरबस परे चले जाते हैं। एक वैश्विक दार्शनिक गल्प-यात्रा पर एक प्रति-सृष्टि में जहाँ वह सब कुछ है जिसे मनुष्य अपनी प्राकृतिक सीमाओं को लाँघकर, अपनी उत्तरजीविता की अन्तहीन आशा में रच सकता है।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 256p
Translator Suraj Prakash
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Sadhna Shankar

Author: Sadhna Shankar

साधना शंकर

साधना शंकर लेखि‍का और भारतीय राजस्व सेवा अधि‍कारी हैं। वे अर्थशास्त्र में पी-एच.डी. हैं। यह उनकी पाँचवीं पुस्तक और दूसरा उपन्यास है। इससे पहले उनका उपन्यास ‘नेवर अ डिस्कनेक्ट’ (2010); निबन्धों का संकलन ‘व्हेन द पैरलल्स मीट’ (2007); और दो यात्रा-वृत्तांत ‘अहलन व सहलन—सीरिया की यात्रा’ (2006) और ‘कैचिंग फ़ायरफ़्लाइज़’ (2016) आ चुके हैं।

वे विभिन्न अंग्रेज़ी पत्र-पत्रि‍काओं के लिए लिखती रही हैं, दूरदर्शन में एंकर और होस्ट के तौर पर कार्यक्रम भी कर चुकी हैं।

ब्लॉग : http://zindagitalkies.wordpress.com

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