Aadhunik Hindi Proyog Kosh

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ISBN:9788171192649
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Aadhunik Hindi Proyog Kosh
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भाषा शब्दों से बनती है। शब्दों के बारे में जानकारी व्याकरण देता है और उनके अर्थों का विवरण कोश प्रस्तुत करता है। इस प्रकार भाषा को जानने-समझने के लिए व्याकरण और कोश दो आधार माने जाते हैं। लेकिन भाषा का एक तीसरा महत्त्वपूर्ण आधार भी है—प्रयोग।

भाषा के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया में नए-नए सन्दर्भों के अनुरूप नए-नए प्रयोग चलते रहते हैं। प्रयोगों से भाषा की प्रभावकता और क्षमता में वृद्धि होती है। इनकी महत्ता इस तथ्य में निहित है कि बहुधा ये व्याकरण और कोश को पीछे छोड़ जाते हैं।

प्रयोगों के फलस्वरूप ही नए-नए पदबन्ध और मुहावरे अस्तित्व में आते हैं। लेखक की लेखनी और वक्ता की वाणी को उनसे ऊर्जा मिलती है। उनके अर्थ अक्सर आप सामान्य कोशों में ढूँढ़ नहीं पाते, व्याकरण से वे सिद्ध नहीं होते, फिर भी वे मान्य और अपरिहार्य होते हैं। एक प्रामाणिक प्रयोग कोश की अनिवार्यता ऐसी ही स्थिति में सामने आती है। यह ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ इसी अभाव की पूर्ति की दिशा में पहला सार्थक प्रयास है।

सुप्रसिद्ध कोशकार डॉ. बदरीनाथ कपूर द्वारा प्रस्तुत ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ उनकी दीर्घकालीन श्रम-साधना का सुफल है। इसमें ऐसे तमाम प्रयोगों के बारे में उदाहरणसहित जानकारी दी गई है जो हिन्दी में प्रचलित और मान्य हैं। आधुनिक प्रयोग इसमें ऐसे हैं जो अभी तक अन्य कोशों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए हैं।

‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि यह समान रूप से भाषा के प्रति जागरूक पाठकों, लेखकों, पत्रकारों, शिक्षकों और छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध हो।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2008
Edition Year 2008, Ed. 1st
Pages 267
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
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Editorial Review

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Badrinath Kapoor

Author: Badrinath Kapoor

बदरीनाथ कपूर
जन्म : 16 सितम्बर, 1932 को, अकालगढ़, ज़िला—गुजराँवाला में (अब पाकिस्तान)।

शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी.।

डॉ. बदरीनाथ कपूर पिछले पाँच दशकों से भाषा, व्याकरण और कोश प्रणयन के क्षेत्र में निरन्तर कार्यरत हैं। डॉ. कपूर 1956 से 1965 तक ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’, प्रयाग द्वारा प्रकाशित ‘मानक हिन्दी कोश’ पर सहायक सम्पादक के रूप में काम करते रहे। बाद में जापान सरकार के आमंत्रण पर टोक्यो विश्वविद्यालय में, 1983 से 1986 तक, अतिथि प्रोफ़ेसर के रूप में सेवा प्रदान की।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘वाक्‍य-संरचना और विश्‍लेषण : नए प्रयोग’, ‘उर्दू-हिन्दी-अंग्रेज़ी त्रिभाषी कोश’, ‘उर्दू हिन्दी कोश’, ‘लोकभारती प्रामाणिक हिन्दी बाल-कोश’, ‘हिन्दी-अंग्रेज़ी पर्यायवाची एवं विपर्याय कोश’, ‘लोकभारती हिन्दी मुहावरे और लोकोक्ति कोश’, ‘लोकभारती बृहत् प्रामाणिक हिन्दी कोश’, ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’, ‘अच्‍छी हिन्दी’, ‘हिन्दी प्रयोग’, ‘नवशती हिन्दी व्‍याकरण’, ‘हिन्दी क्रियाओं की रूप-रचना’ आदि।

डॉ. कपूर की अनेक पुस्तकें उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पुरस्कृत हैं। ‘हिन्दी गौरव सम्‍मान’, ‘श्री अन्नपूर्णानन्द वर्मा अलंकरण’, ‘सौहार्द सम्मान’, ‘काशी रत्न’, ‘महामना मदनमोहन मालवीय सम्मान’, ‘विद्या भूषण सम्मान’ आदि सम्‍मानों से सम्‍मानित।

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