Vivad, Virodh Aur Vikas Ki Narmada

Author: Adil Khan
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Vivad, Virodh Aur Vikas Ki Narmada
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देश की पाँचवीं सबसे बड़ी नदी नर्मदा, अपने अंचल में बसी आबादी के लिए साक्षात् जीवनदायिनी है। इसके विशाल कछार क्षेत्र में फैले वन, वनों में विचरते वन्य प्राणियों और पक्षियों के विविध रूप नर्मदा घाटी को प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य प्रदान करते हैं।

नर्मदा के जल को विकास के लिए दोहन करने के विचार को पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस विकास मॉडल ने आधार प्रदान किया। जिसमें नदियों पर बड़े बाँधों का निर्माण करना प्राथमिकता में सम्मिलित था। लेकिन नर्मदा जल के दोहन के विचार के साथ ही नर्मदा जल बँटवारे का विचार प्रारम्भ हुआ जो कालान्तर में नर्मदा जल विवाद बन गया।

विवादों के निराकरण के प्रयासों में जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन हुआ और लम्बे समय तक केन्द्र और सम्बन्धित राज्यों के बीच नर्मदा जल विवाद निराकरण की गतिविधियाँ चलती रहीं। न्यायाधिकरण ने चार राज्यों में जल का बँटवारा, नर्मदा पर परियोजनाओं का निर्माण, जल का उपयोग, जल विद्युत् उत्पादन और अन्य सम्बन्धित विषयों के साथ ही अनेक अन्तरराज्यीय दायित्वों का भी निर्धारण किया। इस सबके बावजूद राज्यों के बीच छोटे-मोटे विवाद और समस्याएँ उठती रहीं, सुलझती रहीं।

नर्मदा जल विवाद और परियोजनाओं के विरोध का लम्बा इतिहास है। नर्मदा विवाद, विरोध और विकास के विविध आयामों को प्रस्तुत करने का अब तक कोई समग्र प्रयास नहीं हुआ है। इसको देखते हुए यह आवश्यक प्रतीत हुआ कि नर्मदा और उससे सम्बन्धित विवाद, विरोध और विकास के इतिहास और वर्तमान की सम्पूर्ण जानकारी सरल और समग्र रूप में एक जगह संकलित की जाएँ।

 

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2011
Edition Year 2012, Ed. 2nd
Pages 240p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Adil Khan

Author: Adil Khan

आदिल ख़ान

शिक्षा : एम.एस-सी.; वनस्पति विज्ञान, एम.बी.ए., मीडिया प्रबन्धन।

जन्म : पश्चिम मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी के छोटे से क़स्बे कसरावद में 1951 में।

आदिल ख़ान समसामयिक विषयों के सिद्धहस्त लेखक हैं। डेढ़ दशक से भी अधिक समय से मध्य प्रदेश शासन के नर्मदा घाटी विकास विभाग में सूचना और जनसम्पर्क के संयुक्त निदेशक के रूप में आदिल ख़ान ने नर्मदा घाटी की विभिन्न गतिविधियों को निकट से देखा-परखा है और अंचल की अनेक यात्राएँ की हैं। उनके अनुभवों, निष्कर्षों का लाभ कई बार नीति निर्धारण में लिया गया है।

नर्मदा से सम्बन्धित विषयों पर आदिल ख़ान के अनेक विचारोत्तेजक लेख प्रमुख समाचार- पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं। इनमें ‘नर्मदा राष्ट्रीय नदी घोषित हो’ शीर्षक लेख का व्यापक स्वागत हुआ है। नर्मदा पर केन्द्रित आदिल ख़ान के एक गीत को अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडेकर ने स्वरबद्ध भी किया है, जिसे म.प्र. शासन ने इस गीत को नर्मदा घाटी विकास के प्रतिनिधि गीत के रूप में अंगीकार किया है।

नर्मदा घाटी विकास के इतिहास और वर्तमान के सभी पक्षों को समग्र, निरपेक्ष, क्रमिक और सूचनात्मक शैली में प्रस्तुत कर लेखक ने इस विषय में लम्बे समय से अनुभव की जा रही कमी की पूर्ति की है।

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