Usi Ke Naam

Ghazal
Author: Alok Yadav
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Usi Ke Naam
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ख़ुशफ़िक्र शाइर आलोक यादव से मेरा तअल्लुक़ उतना ही पुराना है जितना ख़ुद उनका ग़ज़ल से। तक़रीबन तीन साल क़ब्ल ग़ज़ल से मुताल्लिक़ बुनियादी मालूमात और मुनासिब मशवरों के लिए उन्हें किसी की तलाश थी। उनकी यह तलाशो-जुस्तजू हमारे तअल्लुक़ का सबब बनी।

उनके पास क़ाबिलियत भी है और सलाहियत भी, हस्सास दिल भी है और दुनिया को उसके तमाम रंगों के साथ देखनेवाली नज़र भी। उनकी शायरी में ख़ुलूसो-मोहब्बत के जज़्बों, समाजी क़द्रों, आला उसूलों और इनसानी रिश्तों का एहतराम भी है और ज़ुल्म, जब्र, नाइंसाफ़ी और इस्‍तहसाल के ख़िलाफ़ मोह्ज़्ज़ब एहतिजाज भी। उनके अशआर एक तरफ़ उर्दू से उनके वालिहाना लगाव का ऐलान करते नज़र आते हैं तो दूसरी तरफ़ हिन्दी से उनके मज़बूत रिश्ते और गहरी रग़बत के ग़म्माज़ भी हैं।

अपने शेरी सफ़र के इब्तिदाई दौर ही में अगर कोई इस तरह के चन्द अशआर कहने में कामियाब हो जाए तो उसे अपने शेरी मुस्तक़बिल के ताबनाक होने की उम्मीद बाँधने में झिझक नहीं होती।

हदे-ईमान से आगे मैं जाना चाहता हूँ पर

अभी ईमान आधा है, अभी लग़्ज़िश अधूरी है

मेरे लिए हैं मुसबित ये आईनाख़ाने

यहाँ जमीर मेरा बेनक़ाब रहता है

ख़ुदा करे मंज़िलों की तरफ़ उठनेवाला उनका पहला क़दम ‘उसी के नाम’ ख़ातिख़्वाह पज़ीराई हासिल करे और उनके हौसलों के चराग़ कभी मद्धम न हों।

—अकील नोमानी

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2016
Edition Year 2018, Ed. 2nd
Pages 134p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21 X 13 X 1
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Editorial Review

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Alok Yadav

Author: Alok Yadav

आलोक यादव

जन्म : 30 जुलाई, 2016 को उत्तर प्रदेश के क़ायमगंज, ज़िला—फर्रुखाबाद में।

‘उसी के नाम’ पहला ग़ज़ल संग्रह है।

भारत सरकार के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के पद
पर आसीन आलोक यादव वर्ष 2014 में इंटरनेशनल इन्टेलेक्चुअल पीस अकेडमी द्वारा
‘डॉ. इक़बाल उर्दू अवार्ड’ एवं ‘डॉ. आसिफ़ बरेलवी अवार्ड’ से नवाज़े गए। वर्ष 2015 में ‘दुष्यन्त कुमार सम्मान’ मिला एवं 2016 में विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधि दी गई।

ई-मेल : alokyadav1@rediffmail.com

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