Urvar Pradesh

Poetry
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Urvar Pradesh
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कवि भारतभूषण अग्रवाल उन थोड़े से वरिष्ठ कवियों में से थे जिनसे युवतम कवि भी बिना किसी हिचक या संकोच के मिल सकते थे। वे उनसे समानता और प्रसन्न गरमाहट का व्यवहार करने में कभी चूकते नहीं थे। भारत जी के आकस्मिक देहावसान के बाद जब कुछ मित्रों ने, उनकी पत्नी बिन्दु अग्रवाल की पहल और ज़िम्मेदारी पर, किसी वर्ष में प्रकाशित किसी युवा कवि की श्रेष्ठ कविता के लिए उनके नाम पर एक पुरस्कार स्थापित करने का निर्णय लिया तो उनकी युवतर कवियों से निकटता, उनके प्रति उत्साह और उनमें से कइयों के साथ उनकी सहज आत्मीयता को भी बराबर ध्यान में रखा गया था।

अब तक पुरस्कृत कवियों की पुरस्कृत कविताओं के अलावा उनके वक्तव्य और कुछ ताज़ा कविताएँ इस संचयन में शामिल हैं। उन्हें बहुत मनोयोग से भारत जी की बेटी और विख्यात भाषावैज्ञानिक अन्विता अब्बी ने एकत्र किया है। मंशा कुछ यह रही है कि तीस बरस बाद इसका कुछ आकलन हो कि युवा कवि, जिनमें कई अब लगभग वरिष्ठ हो चुके हैं, अपनी कविता और विचार में, भाषा और शिल्प में, मानवीय सच्चाई की अपनी खोज और आत्मसंघर्ष में, व्यापक कविता दृश्य में किस जगह और किस मुक़ाम पर पहुँचे हैं।

इस संचयन से स्पष्ट होता है कि हिन्दी कविता में विस्मयकारी बहुलता है। यह अनुभव करना उत्साहवर्द्धक और विचारोत्तेजक है कि युवा कवियों में किसी एक दृष्टि, एक शैली, एक विचारप्रवृत्ति का वर्चस्व नहीं है। हर स्तर पर बहुलता है जैसे कि हिन्दी भाषा, साहित्य और समाज में भी बहुलता है। यह बहुलता किसी तरह की पक्षहीनता, तटस्थता या उदासीनता का साक्ष्य नहीं है। उलटे प्रायः इन सभी कवियों में अपने आस-पास की ज़िन्दगी, उसकी विडम्बनाओं और अन्तर्विरोधों, उसमें गुँथे-फँसे अच्छे-बुरे अनुभवों के प्रति खुलापन है। दरअसल यह जटिल ज़िन्दगी ही इस सारी कविता का ‘उर्वर प्रदेश’ है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2009
Edition Year 2010, Ed. 2nd
Pages 367p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Editorial Review

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Author: Anvita Abbi

अन्विता अब्बी

जन्‍म : 9 जनवरी, 1949

शिक्षा : 1968 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र (बीए ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। 1970 में पहले डिवीजन और प्रथम रैंक के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय से ही भाषाविज्ञान में मास्टर डिग्री (एमए) हासिल की और 1975 में कॉर्नेल विश्वविद्यालयइथाका, यूएसए से पीएच.डी. की।

उन्होंने कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी में फरवरी, 1975 में दक्षिण एशिया मीडिया केन्‍द्र के निदेशक के रूप में अपना कैरियर शुरू किया और वहाँ एक साल तक काम किया। वर्ष 2000 एवं 2003 में मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट, लाइपज़िग, जर्मनी में अतिथि वैज्ञानिक रहीं और 2001 में लात्रोब यूनिवर्सिटी, मेलबॉर्न के लैंग्वेज टाइपोलॉजी रिसर्च सेंटर द्वारा विशिष्ट शोधवृत्ति के लिए नामित की गईं। लिंग्विस्टिक सोसायटी ऑफ़ अमेरिका द्वारा मानद सदस्य मनोनीत। यूनेस्को सहित कई संस्थाओं के लिए भाषा-सम्बन्धी मुद्दों पर सलाहकार।

भारत की अल्पज्ञात और आदिवासी भाषाओं पर व्यापक कार्य। कई पुस्तकें एवं विभिन्न पत्रिकाओं में अनेक शोध-लेख प्रकाशित। एक कहानी-संग्रह भी प्रकाशित।

सम्‍मान : ‘लोकभाषा सम्मान’, ‘पद्मश्री’ तथा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भाषाविज्ञान विभाग में विलुप्त होती हुई भाषाओं और इन भाषाओं के अस्तित्व के संरक्षण के लिए ‘लाइफ़ टाइम अचीवमेंट एवार्ड’ आदि।

अन्विता जी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापन एवं शोध-कार्य से जुड़ी रहीं। वे अन्तरराष्ट्रीय वृहद् परियोजना ‘वैनिशिंग वॉयसिज ऑफ़ द ग्रेट अंडमानीज़' की निदेशक भी रही हैं। 

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