Tanh Tanh Bhrashtachar

Satire
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Tanh Tanh Bhrashtachar
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हिन्दी साहित्य में व्यंग्य-लेखन की अनेक प्रविधियाँ और छवियाँ विद्यमान हैं। सबका लक्ष्य एक ही है—उन प्रवृत्तियों, व्यक्तियों व स्थितियों का व्यंजक वर्णन जो विभिन्न विसंगतियों के मूल में हैं। 'तहँ तहँ भ्रष्टाचार' व्यंग्य-संग्रह में सतीश अग्निहोत्री ने समकालीन समाज की अनेक विसंगतियों पर प्रहार किया है। फैंटेसी का आश्रय लेते हुए लेखक ने राजनीति के गर्भ से उपजी विभिन्न समस्याओं का विश्लेषण किया है।

ज्ञान चतुर्वेदी के शब्दों में, ‘सतीश अग्निहोत्री के इस व्यंग्य-संग्रह की अधिकांश रचनाओं में यह व्यंग्य-कौशल बेहद मेच्योरली बरता गया दिखता है। व्यंग्य के उनके विषय तो नए हैं ही, उनको पौराणिक तथा लोक-ग़ल्पों से जोड़ने की उनकी शैली भी बेहद आकर्षक है। आप मज़े-मज़े से सब कुछ पढ़ जाते हैं और फैंटेसी में बुने जा रहे व्यंग्य की डिजाइन को लगातार समझ भी पाते हैं।’

व्यंग्यकार के लिए ज़रूरी है कि उसके पास सन्दर्भों की प्रचुरता हो। वह विभिन्न प्रसंगों को वर्णन के अनुकूल बनाकर अपने मन्तव्य को विस्तार प्रदान करे। सतीश अग्निहोत्री केवल पौराणिक व लोक प्रचलित सन्दर्भों से ही परिचित नहीं, वे आधुनिक विश्व की विभिन्न उल्लेखनीय घटनाओं का मर्म भी जानते हैं। पौराणिक वृत्तान्त में लेखक अपने निष्कर्षों के लिए स्पेस की युक्ति निकाल लेता है।

‘एक ब्रेन ड्रेन की कहानी’ के वाक्य हैं, ‘कार्तिकेय मेधावी थे, पर तिकड़मी नहीं। इस देश को रास्ता बनानेवाले इंजीनियरों की ज़रूरत नहीं है, केवल पैसा ख़र्च करनेवाले इंजीनियरों की है।’ यह व्यंग्य-संग्रह प्रमुदित करने के साथ प्रबुद्ध भी बनाता है, यही इसकी सार्थकता है।

More Information
LanguageHindi
FormatHard Back
Publication Year2014
Edition Year2017, Ed. 2nd
Pages144p
TranslatorNot Selected
EditorNot Selected
PublisherRajkamal Prakashan
Dimensions22 X 14 X 1
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Editorial Review

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Author: Satish Agnihotri

सतीश अग्निहोत्री

जन्म : 1955; रत्नागिरि (महाराष्ट्र)।

फ़िजिक्स में स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद आई.आई.टी. से फ़िजिक्स में एम.एस-सी.। इंग्लैंड के ईस्ट आँग्लिया विश्वविद्यालय से एम.ए.। भारत में बालिकाओं की घटती संख्या पर शोध-कार्य कर पीएच.डी. प्राप्त की। अमर्त्य सेन और आशीष बोस जैसे विद्वानों ने उनके शोध को सराहा। 1980 में आई.आई.टी. पवई से पर्यावरण अभियांत्रिकी में एम.टेक. कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में दाख़िल हुए।

ओडिशा राज्य में कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें अक्षय ऊर्जा, महिला एवं शिशु विकास और परिवहन कमिश्नर का कार्य चर्चित रहा।

सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य, फंतासी लिखना जारी है। ‘धर्मयुग’, ‘रविवार’, ‘प्रभात ख़बर’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ और ‘लफ़्ज़ֹ’ में लिखते रहे हैं। हिन्दी में विज्ञान कथाएँ लिखना और शब्द पहेलियाँ बनाना भी उनका शगल है।

रक्षा मंत्रालय में महानिदेशक के रूप में कार्य। अब सेवानिवृत्‍त।

 

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