Sanshodayu

Author: Mori Ogai
Translator: Unita Sachchidanand
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sanshodayu
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‘जापान’ का नाम सुनते ही आज आधुनिकता, समृद्धि और चकाचौंध का विचार कौंधता है। लेकिन सौ बरस पहले का जापान क़तई अलग था। इस संकलन में शामिल मोरी ओगाई (1862-1922) की तीन कहानियाँ तत्कालीन जापान की एक दूसरी तस्वीर पेश करती हैं। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रची गई ये कहानियाँ—‘सूर्योदय के देश’ के सामन्ती युग के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती हैं। सानशोदायु, अँधेरे में एक नाव चलती थी और आख़िरी पंक्ति आपराधिक कथानकों के ज़रिए तत्कालीन राज और समाज की विद्रूपताओं को एक-एक कर सामने लाती हैं। लेकिन, ये कहानियाँ आपराधिक दृष्टान्त मात्र नहीं हैं। सानशोदायु और आख़िरी पंक्ति में आप पाएँगे कि किस तरह बाल चरित्र सामाजिक विसंगतियों से मुक़ाबले के लिए ऐसे वक़्त में उठ खड़े होते हैं, जब उनके अग्रज व्यवस्था के सामने हथियार डाल देते हैं। नन्हे चरित्र तत्क्षण महाकार ले लेते हैं। वे जापानी समाज को ‘आत्मबलिदान’ जैसी सर्वथा नई अवधारणाएँ सिखाते हैं। ‘अँधेरे में’ कहानी जापानी जनमानस पर बौद्ध मत के प्रभाव को ख़ासकर उकेरती है। इसलिए यह भारतीय पाठक को ख़ासकर अपील करेगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में अवतरित इन कहानियों के ज़रिए जापान के सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक जीवन-दर्शन को जानने का अवसर प्राप्त होगा। कहानियों के साथ प्रविष्ट टिप्पणियाँ पाठकों की जिज्ञासा के अनुरूप दी गई हैं।

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Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1998
Edition Year 2023, Ed. 3rd
Pages 104p
Translator Unita Sachchidanand
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Author: Mori Ogai

मोरी ओगाई

मोरी ओगाई के बग़ैर आधुनिक जापानी साहित्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने जापानी साहित्य को नई मान्यताओं, विचारधारा और शैली से लैस किया। वह अपने अनुवर्ती रचनाकारों के लिए बड़े प्रेरणास्रोत बने कि विश्वप्रसिद्ध कृति ‘राशोमोन’ के रचयिता र् यूनोसुके आकुतागावा जैसे नवोदित लेखकों ने उन्हें अपना गुरु माना। ओगाई 1884 में चिकित्साशास्त्र का अध्ययन करने जर्मनी गए। चार साल बाद वह जापान लौटे तो उनके पास चिकित्सा का उच्च ज्ञान ही नहीं, यूरोपीय साहित्य और संस्कृति का विशद अध्ययन भी था। यही कारण है कि उनके साहित्य में पाश्चात्य चिन्तन और दर्शन की गहरी छाप देखने को मिलती है। ओगाई को जापानी साहित्य में रोमानीवाद का सूत्रधार माना जाता है। इस सन्दर्भ में उनकी कृतियाँ ‘माहिहिमे’, ‘सेइनेने’ और ‘गान’ महत्त्वपूर्ण हैं।

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