“कितने ही राजा तो पिशाच होते हैं। अब एक पिशाच ही राजा हो गया तो क्या बिगड़ जाएगा? सुनिए कुमार, सुनिए रानी माँ! देश के चारों ओर विद्रोह की आग धधक रही है। वृषल की ताक़त दिन-पर-दिन बढ़ती जा रही है। ऐसी हालत में यदि यह बात फैल गई कि हमारे राजा जाली राजा हैं तो वह आग भक् से दावानल बन जाएगी। नन्दवंशियों का सिंहासन विद्रोहियों के पेट में चला जाएगा। आप लोग सोचकर देखिए, क्या उससे अच्छा यह न होगा कि इस पिशाच को ही हम लोग और शक्तिशाली बनाएँ? पिशाच के कन्धों पर धनुष रखकर विद्रोहियों का नाश करें? सिंहासन का बड़ा शत्रु कौन है कुमार—पिशाच या वृषल?’’

—इसी पुस्तक से

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2007
Edition Year 2007, Ed. 1st
Pages 111p
Translator Pratibha Agarwal
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 18 X 11.5 X 0.5
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Author: Manoj Mitra

मनोज मित्रा

जन्म : 22 दिसम्बर, 1938; खुलना, बांग्लादेश।

शिक्षा : स्कॉटिश चर्च कॉलेज से दर्शनशास्त्र में स्नातक, कोलकाता विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में ही एम.ए.।

प्रख्यात नाटककार मनोज मित्रा कॉलेज के दौरान ही कविता-लेखन और रंगमंच से जुड़े। इनके नाटकों के अनुवाद कई भाषाओं में हुए। रतन थियम और राजेन्द्र सिंह जैसे रंगमंच के दिग्गजों ने उनके नाटकों को प्रोड्यूस किया। उन्होंने फ़िल्मों और नाटकों पर कई महत्‍त्‍वपूर्ण किताबें लिखीं। रबीन्द्र भारती यूनिवर्सिटी के ड्रामा विभाग में अध्यापन किया। नाटक के लेखन, निर्देशन और अभिनय से जुड़े रहे। तपन सिन्हा, सत्यजीत रे जैसे विश्वप्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशकों की फ़िल्मों में अभिनय किया।

वर्तमान में ‘पश्चिम बंग नाट्य अकादेमी’ और ‘सुन्दरम’ के अध्यक्ष हैं।

प्रमुख नाटक : ‘मृत्युर चोखे जल’, ‘सजनो बगान’, ‘परबस’, ‘अलोकनान्दार पुत्र कन्या’, ‘नरक गुलजार’, ‘अश्वत्थामा’ आदि।

सम्मान : ‘संगीत नाटक अकादेमी पुरस्‍कार’, ‘पश्चिम बंगाल राज्य सरकार सम्मान’, ‘कोलकाता विश्वविद्यालय सम्मान’, ‘एशियाटिक सोसायटी स्वर्ण पदक’, ‘दीनबन्‍धु पुरस्कार’, ‘कलाकार सम्मान’, बांग्लादेश थियेटर सोसायटी का ‘मुनीर चौधरी सम्मान’, ‘फ़िल्म फ़ेयर सम्मान’ (ईस्ट)।

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