Khambhon Per Tiki Khushabu

Author: Narendra Nagdev
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Khambhon Per Tiki Khushabu
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भवन-निर्माण के व्यवसाय में गहरी जड़ें जमा चुके, हर क़ीमत पर कांट्रैक्ट हासिल कर लेनेवाले कुख्यात टेंडर माफ़िया की आतंककारी कार्यप्रणाली तथा उन्हें रोकने को कटिबद्ध, एक समर्पित, सृजनशील वास्तुकार का उनके साथ जोखिम-भरे संघर्ष का दस्तावेज़...

संघर्ष में एक सकारात्मक तथ्य को रेखांकित करता कि सृष्टि वह दानव नहीं चलाता जो अपने अहंकारवश बाढ़ ला देता है पूरे शहर में, वरन् उस चिड़िया के पंख चलाते हैं जो चोंच में तिनका दबाकर, तिनके में पानी की एक बूँद उठाकर, बार-बार फेंक आती है शहर के बाहर ताकि धीरे-धीरे बाढ़ से मुक्त हो सके शहर...

आर्किटेक्चर क्षेत्र के सघन व्यावसायिक घटनाक्रम के साथ-साथ एक लोककथात्मक फ़ैंटेसी की महीन बुनावट और विध्वंसक शक्तियों के गाल पर तमाचा-सा जड़ता एक अतियथार्थवादी चरम...

वर्तमान और अतीत के बीच, कल्पना और यथार्थ के बीच, सही और ग़लत के बीच झूलता हुआ सा, एक मोहक शिल्प तथा भाषा के सहज प्रवाह से युक्त नरेन्द्र नागदेव का आत्मीय, संवेदनशील प्रस्तुतीकरण—‘खम्भों पर टिकी ख़ुशबू...’

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2008
Edition Year 2008, Ed. 1st
Pages 260p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Narendra Nagdev

Author: Narendra Nagdev

नरेन्द्र नागदेव

जन्म : 14 सितम्‍बर, 1946; उज्जैन (म.प्र.)।

शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा उज्जैन में ग्रहण की। 1966 में सर जे.जे. कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर (बम्बई विश्वविद्यालय) से आर्किटेक्चर में डिग्री। फिर दिल्ली में बस गए, फिर सिवाय तीन वर्ष (1978-81) के कार्यकाल के, त्रिपोली (लीबिया) में आर्किटेक्ट के पद पर कार्यरत रहे।

प्रमुख कृतियाँ : ‘तमाशबीन’, ‘उसी नाव में’, ‘बीमार आदमी का इक़रारनामा’, ‘वापसी के नाखून’, ‘सैलानी’ तथा ‘वहीं रुक जाते’ (कहानी-संग्रह); वास्तुकला के व्यवसाय पर आधारित उपन्यास ‘अन्वेषी’ एवं ‘खंभों पर टिकी ख़ुशबू’ प्रकाशित। रचनाएँ विभिन्न भाषाओं में अनूदित।

सम्मान : मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् द्वारा उपन्यास ‘अन्वेषी’ पर ‘कृति पुरस्कार’ तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा कहानी-संग्रह ‘बीमार आदमी का इक़रारनामा’ पर ‘कृति सम्मान’। ऑल इंडिया फ़ाइन आइस एंड क्राफ़्ट्स सोसायटी का ‘वार्षिक पुरस्कार’ आदि।

राष्ट्रीय स्तर की अनेक वास्तुकला प्रतियोगिताओं में विजेता तथा देश-विदेश में महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की डिज़ाइनें कीं। अनेक चित्रकला प्रदर्शनियों में भागीदारी के अलावा नई दिल्ली में चित्रों की कई एकल प्रदर्शनियाँ।

फ़िलहाल सेवानिवृत्‍त होने के बाद स्‍वतंत्र लेखन।

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