Kavya Ke Tattva

Literary Criticism
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Kavya Ke Tattva
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प्रस्‍तुत पुस्‍तक का उद्देश्‍य है भारतीय दृष्टि से काव्‍य के उपादानों का परिचय कराना। सुगमता और संक्षिप्‍तता इसकी विशेषताएँ हैं। उदाहरण विषय को स्‍पष्‍ट करने के साधन हैं। अत: उनकी सटीकता तथा उपयुक्‍तता को महत्‍त्‍व दिया गया है और उनके चयन में सावधानी बरती गई है। इस पुस्‍तक में दिए गए उदाहरण विषय के स्‍पष्‍टीकरण एवं स्‍मरण में निस्‍सन्‍देह सहायक सिद्ध होंगे।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 1st
Pages 160p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Editorial Review

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Aacharya Devendranath Sharma

Author: Aacharya Devendranath Sharma

आचार्य देवेन्द्रनाथ शर्मा

जन्‍म : 1918

सफल नाट्यकार और निपुण निबन्धकार।

प्रभावी वक्ता तथा प्रकीर्तित लेखक।

पटना विश्वविद्यालय तथा दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व-कुलपति। अन्तरविश्वविद्यालय बोर्ड, संस्कृत अकादमी तथा भोजपुरी अकादमी, बिहार के पूर्व अध्यक्ष। पूर्व अध्यक्ष, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी। पटना विश्वविद्यालय तथा बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष। अध्यक्ष, भारतीय हिन्दी परिषद्, ग्वालियर तथा आनन्द अधिवेशन तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना।

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार की प्रवर-समिति के पूर्व सदस्य। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली आयोग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, भारत सरकार एवं बिहार सरकार की अनेक समितियों के पूर्व अध्यक्ष/सदस्य।

इंग्लैंड, फ़्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, सोवियत संघ, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, मॉरिशस, कोरिया आदि देशों का शैक्षिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण।

प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ : आलोचना—‘राष्ट्रभाषा हिन्दी : समस्याएँ और समाधान’, ‘भामह-विरचित काव्यालंकार का हिन्दी भाष्य’, ‘पाश्चात्य काव्यशास्त्र’, ‘अलंकार मुक्तावली’, ‘काव्य के तत्त्व’; नाट्य—‘पारिजात मंजरी’, ‘बिखरी स्मृतियाँ’, ‘शाहजहाँ के आँसू’, ‘मेरे श्रेष्ठ रंग एकांकी’; ललित निबन्ध—‘खट्टा-मीठा’, ‘आईना बोल उठा’, ‘प्रणाम की प्रदर्शनी में’।

सम्मान : ‘सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार’, ‘वरिष्ठ हिन्दी सेवी पुरस्कार’ आदि।

निधन : 1991 

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