Dinkar

Literary Criticism
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Dinkar

दिनकर जी जब काव्य के क्षेत्र में आए, उस समय हिन्दी में कविता की दो धाराएँ बहुत ही स्पष्ट थीं। एक धारा छायावादी काव्य की थी, जिस पर आक्षेप यह था कि वास्तविकता से ईषद् दूर है। दूसरी धारा राष्ट्रीय कविताओं की थी जो वास्तविकता की अत्यधिक आराधना करने के कारण कला की सूक्ष्म भंगिमाओं को अपनाने में असमर्थ थी।

दिनकर जी ने काव्य-पाठकों का ध्यान विशेष रूप से इसलिए आकृष्ट किया कि उन्होंने कला को वास्तविकता के समीप ला दिया, अथवा यों कहें कि राष्ट्रीय धारा की कविताओं में उन्होंने कला की सूक्ष्मातिसूक्ष्म भंगिमाएँ उत्पन्न कर दीं। दिनकर जी में शक्ति और सौन्दर्य का जो मणिकांचन-संयोग दिखाई पड़ा, वही उनकी कीर्ति का आधार बना।

प्रस्तुत कृति दिनकर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विशद् रूप में प्रकाश डालनेवाली हिन्दी में अपने ढंग की पहली पुस्तक है। इस पुस्तक में हिन्दी के अधिकारी लेखकों ने दिनकर जी की कृतियों पर अपने महत्त्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए हैं—दिनकर-साहित्य के जिज्ञासु पाठकों तथा छात्रों के लिए सर्वथा संग्रहणीय।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1967
Edition Year 1967, Ed. 1st
Pages 237p
Translator Translator One
Editor Editor One Name
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Savitri Sinha

Author: Savitri Sinha

सावित्री सिन्हा

जन्म : 2 फरवरी, 1922

शिक्षा : 1945 में एम.ए., लखनऊ विश्वविद्यालय (प्रथम स्थान)। 1951 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ‘मध्ययुगीन हिन्दी कवयित्रियाँ’ विषय पर पीएच.डी., 1960 में लखनऊ विश्वविद्यालय से ‘ब्रजभाषा काव्य में अभिव्यंजना’ पर डी.लिट्.।

1946 में इन्द्रप्रस्थ कॉलेज में प्राध्यापक। 1950 में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में रीडर और 1968 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुईं।

प्रमुख कृतियाँ : ‘मध्ययुगीन हिन्दी कवयित्रियाँ’, ‘ब्रजभाषा के कृष्णभक्ति काव्य में अभिव्यंजना-शिल्प’, ‘युगचारण दिनकर’ और ‘तुला और तारे’ (मौलिक पुस्‍तकें); ‘अनुसन्‍धान का स्वरूप’, ‘अनुसन्धान की प्रक्रिया’, ‘मुट्ठियों में बन्द आकाश’, नागरी प्रचारिणी सभा से प्रकाशित ‘हिन्दी साहित्य का बृहद् इतिहास’, ‘प्रसादोत्तर नाटक खंड’ (उत्कर्ष काल) और ‘पाश्चात्य काव्यशास्त्र की परम्परा’ (सम्पादित पुस्‍तकें)।

सम्‍मान : डी.लिट्. के प्रबन्ध पर उत्तर प्रदेश सरकार का ‘विशेष पुरस्कार।’ लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा ‘बनर्जी रिसर्च पुरस्कार’।

निधन : 25 अगस्त, 1972

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